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लोकसभा चुनाव 2019: सनी देओल के लिए भी 'लकी' हो सकता है स्याल हाउस, विरोधी भी तारीफ में बोले...
Wed, 24 Apr 2019 10:08 AM IST
खुशबू गोयल
नवदीप शर्मा, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
नवदीप शर्मा, अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Apr 2019 10:08 AM IST
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अभिनेता सनी देओल
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए पंजाब के गुरदासपुर से सनी देओल चुनाव लड़ रहे हैं और यहां का स्याल हाउस उनके लिए भी 'लकी' साबित हो सकता है। जानिए कैसे और क्यों।
सनी देओल
अभिनेता सनी देओल ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसी के साथ उन्हें पंजाब के गुरदासपुर सीट से टिकट दे दिया गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में सनी देओल ने भाजपा की सदस्यता ली। उन्होंने कहा, "जिस तरह मेरे पिता अटलजी से जुड़े, उसी तरह मैं मोदीजी से जुड़ने आया हूं। मैं चाहता हूं कि अगले पांच साल भी मोदीजी रहें। मैं काम करके दिखाऊंगा।" वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सनी देओल के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर कहा कि जहां तक वह सनी को जानते हैं, वह एक बढ़िया इंसान हैं, इसके लिए भाजपा को बधाई।
सनी देओल
स्याल हाउस में लौटी रौनक
गुरदासपुर से सनी देओल की उम्मीदवारी से स्याल हाउस में रौनक लौट आई है। लोकसभा चुनाव के लिए छह दिन पहले स्याल हाउस का उद्घाटन किया गया था। इसके बाद से यह सूना पड़ा था। स्याल हाउस छठी बार भाजपा का लोकसभा दफ्तर बनाया गया है। इसे पूर्व सांसद विनोद खन्ना का लकी दफ्तर कहा जाता है, क्योंकि इसी दफ्तर से सारी गतिविधियों को चला विनोद खन्ना ने चार बार चुनाव जीता। उनके निधन के बाद 2017 उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी स्वर्ण सलारिया ने डल्हौजी रोड पर दफ्तर खोला और वह हार गए।
गुरदासपुर से सनी देओल की उम्मीदवारी से स्याल हाउस में रौनक लौट आई है। लोकसभा चुनाव के लिए छह दिन पहले स्याल हाउस का उद्घाटन किया गया था। इसके बाद से यह सूना पड़ा था। स्याल हाउस छठी बार भाजपा का लोकसभा दफ्तर बनाया गया है। इसे पूर्व सांसद विनोद खन्ना का लकी दफ्तर कहा जाता है, क्योंकि इसी दफ्तर से सारी गतिविधियों को चला विनोद खन्ना ने चार बार चुनाव जीता। उनके निधन के बाद 2017 उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी स्वर्ण सलारिया ने डल्हौजी रोड पर दफ्तर खोला और वह हार गए।
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अभिनेता सनी देओल
1998 में जब विनोद खन्ना गुरदासपुर से चुनाव लड़ने आए, तो उन्होंने शहर के बजरी कंपनी स्थित स्याल हाउस में पूरे लोकसभा हलके का चुनाव कार्यालय खोला और चुनाव जीते। टिंबर कारोबारी की कोठी स्याल हाउस ज्यादातर बंद रहती है, सिर्फ चुनावों में ही दफ्तर बनती है। फिर 1999, 2004, 2009 और 2014 में स्याल हाउस ही खन्ना का चुनाव दफ्तर रहा। 2017 में स्वर्ण सलारिया अपना दफ्तर यहां से हटाकर एसडीएम कोर्ट के सामने ले गए। लिहाजा, एक बार फिर पार्टी ने स्याल हाउस में ही चुनाव दफ्तर बनाने का फैसला लिया है।
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सनी देओल
- फोटो : ani
सनी देयोल अपने पिता धर्मेंद्र की सरजमीं पंजाब से सियासत में एंट्री कर रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पुणे एयरपोर्ट पर सनी से मुलाकात की थी, जिसमें सब कुछ फाइनल हुआ। धर्मेंद्र मूल रूप से लुधियाना में पखोवाल के पास के गांव डांगों के रहने वाले थे। उनके पिता सरकारी स्कूल में हेड मास्टर थे तो परिवार साहनेवाल शिफ्ट हो गया। यहीं से धर्मेंद्र अदाकार बनने मुंबई गए और वहीं के होकर रह गए। सनी और परिवार के बाकी सदस्य यहां कभी नहीं आए। लेकिन उनका पंजाब कनेक्शन है, इसीलिए भाजपा उन्हें यहां से चुनाव लड़ा रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने भी सनी को लुधियाना सीट से लड़ाने की कोशिश की थी, पर बात नहीं बन सकी थी। दयोल परिवार के तीसरे सदस्य ने राजनीति में एंट्री की है। धर्मेंद्र 2004 में बीकानेर से सांसद थे। हेमा मालिनी मथुरा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।