24 साल की उम्र में शहीद हुए गुरप्रीत को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, छोटे भाई ने दी चिता को अग्नि
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जम्मू-कश्मीर के लेह सेक्टर में मंगलवार को शहीद हुए फौजी गुरप्रीत सिंह (24) का गुरुवार को उनके पैतृक गांव धर्मगढ़ में गमगीन माहौल में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हर किसी की आखें नम थीं। प्रशासनिक व पुलिस प्रशासन सहित राजनीतिक, धार्मिक व सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि और बड़ी सख्या में इलाका वासियों ने शहीद को अंतिम श्रद्धांजलि दी।
शहीद गुरप्रीत सिंह के पार्थिव शरीर को गुरुवार सुबह सात बजे एयर लिफ्ट करके लेह से चंडीगढ़ लाया गया था, जहां से सेना की गाड़ी से पार्थिव शरीर को गांव धर्मगढ़ लाया गया। इस दौरान जब शहीद के पार्थिव शरीर को ताबूत से निकाला गया और शहीद की वर्दी व बेल्ट उनके पिता धर्मपाल को सौंपी गई तो माहौल गमगीन हो गया।
बहनों व भाई का रो-रो कर बुरा हाल था। श्मशान घाट में सेना की टुकड़ी ने शहीद को सलामी देने के बाद अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। शहीद की चिता को अग्नि छोटे भाई मनप्रीत सिंह ने दी। शहीद गुरप्रीत सिंह दो बहनों और दो भाइयों में तीसरे नंबर पर था। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन रेनू बाला की नवंबर में शादी तय थी, जिसके लिए परिवार तैयारी कर रहा था। मां का पहले ही देहांत हो चुका है। शहीद के पिता मेहनत मजदूरी व हलवाई का काम करते हैं।
2014 में सिख रेजिमेंट में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे गुरप्रीत सिंह
24 वर्षीय गुरप्रीत सिंह सिख रेजिमेंट में बतौर सिपाही 2014 में भर्ती हुए थे। शहीद के पार्थिव शरीर के साथ आए सूबेदार मेजर सिंह ने बताया कि गुरप्रीत सिंह जम्मू-कश्मीर के लेह सेक्टर में अपनी प्लाटून के 50-60 जवानों के साथ फायरिंग अभ्यास कैंप में गए थे।
9 जुलाई को 11 बजे के बाद वह फायर कर रहे थे कि अचानक ब्लास्ट हो गया और गुरप्रीत सहित तीन जवान जख्मी हो गए थे। तीनों को तुरंत लेह मिलिट्री अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उपचार के दौरान गुरप्रीत सिंह शहीद हो गए। दो अन्य सिपाही मनरूम सिंह व संदीप सिंह की हालत ठीक है, जो अभी उपचाराधीन हैं।