पाकिस्तान में फांसी की सजा पाए कुलभूषण जाधव की कहानी इस कश्मीरी युवक से मिलती जुलती है, जिसने पाकिस्तानी जेल में बहुत दर्द सहा।
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इस कश्मीरी युवक के जैसी है कुलभूषण जाधव की कहानी
गलती से पाकिस्तान पहुंचे इस कश्मीरी युवक को वहां की जेल में जो दर्द मिला, वो उसे भारत माता के गीतों में पिरोता रहा। कश्मीर के बारामूला इलाके का रहने वाला 32 वर्षीय इनायत 86 भारतीय मछुआरों के साथ भारत लौटा है। साल 2011 में सउदी अरब जाने के चक्कर में यह युवक पाकिस्तान चला गया था और उसे भारतीय जासूस समझ कर पकड़ लिया गया।
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इस कश्मीरी युवक के जैसी है कुलभूषण जाधव की कहानी
इनायत कहता है कि वो 5 साल तक पाकिस्तानी जेलों में रहा। पाकिस्तान में उसे कभी लांडी, कभी कोटलखपत तो कभी किसी अन्य जेल में भेज दिया जाता था। जेलों में अक्सर उसके साथ मारपीट की जाती रही। जख्मों में दर्द होता और देश या घरवालों की याद आती तो हालात को कोसने की बजाय उन शब्दों को गीतों की शक्ल में ढालता।
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इस कश्मीरी युवक के जैसी है कुलभूषण जाधव की कहानी
इनायत के बनाए गीतों में 'दिल्ली मेरा दिल है, सिर मेरा कश्मीर, रगों में मेरी कल-कल करता गंगा-यमुना नीर... तथा 'है वतन ईमान मेरा इसपे सब कुर्बान, मैं हूं मुस्लिम-हिंद का वतन मेरा भगवान...। जैसे दर्जनों गीत शामिल हैं। जेल में कागज कलम रखने पर मनाही थी, जिस कारण रची गई लाइनों को बार-बार रटता। एक याद होने पर दूसरी शुरू कर देता। इस काम में वह रोजाना चार घंटे लगाता।
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इनायत ने बताया कि इस तरह से उसने 35 गीत तैयार किए। अब वह अपने इस हुनर से कश्मीरी युवकों में वतनपरस्ती की अलख जगा रहा है। बता दें कि परिवार में उसके दो छोटे भाई, एक बड़ी बहन और पिताजी हैं। मां का निधन हो चुका है। यही कारण रहा कि वह पैसे कमाने के चक्कर में सरहद पार चला गया, लेकिन पकड़ा गया।