कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से उठे किसानों के आंदोलन ने अब दिल्ली के दरवाजे पर दस्तक दे दी है। ये किसान पिछले 50 दिन से पंजाब में अलग-अलग जगह धरना दे रहे थे। ज्यादातर धरना टोल प्लाजा, रेल ट्रैक और पेट्रोल पंपों के बाहर लगाए गए थे। केंद्र सरकार ने तीन बार पंजाब के 30 किसान संगठनों से बात की। हालांकि ये सभी बैठकें बेनतीजा रहीं। अब एक बार फिर केंद्र ने तीन दिसंबर को बातचीत का न्योता दिया है। लेकिन किसान उससे पहले ही दिल्ली कूच कर गए। पंजाब से दिल्ली पहुंचने तक किसानों का संघर्ष चुनौतियों से भरा रहा है।
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मार्ग से अवरोध हटाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
इन बॉर्डर से हरियाणा में घुसे किसान
25 नवंबर की रात से ही पंजाब के हजारों किसानों ने हरियाणा बॉर्डर पर डेरा डाल दिया था। उधर, किसानों को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस भी मुस्तैद रही। अंत: भारी हंगामे के बीच किसान हरियाणा में दाखिल होने में कामयाब रहे। अब भी हरियाणा-पंजाब सीमा पर किसानों के काफिले लगातार पहुंच रहे हैं।
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सड़क पर प्रशासन ने डाली मिट्टी पत्थर।
- फोटो : अमर उजाला
शंभू बॉर्डर- अंबाला के पास शंभू बॉर्डर से पंजाब के किसान हरियाणा में दाखिल हुए। इससे पहले यहां भारी हंगामा हुआ। नाराज किसानों ने बैरिकेड नदी में फेंक दिया तो पुलिस ने भी पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले दागे। लिहाजा किसान अपनी रणनीति में कामयाब हुए और सड़क और खेत के रास्ते हरियाणा में दाखिल हुए।
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दिल्ली कूच से पहले रास्ते से मिट्टी हटाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
खनौरी बॉर्डर- खनौरी सीमा पर भी पंजाब के हजारों किसानों का काफिला पहुंचा। यहां प्रशासन ने रोड पर बड़े-बड़े पत्थर और कंटीले तार बिछा रखे थे। कुछ जगह सड़कों पर मिट्टी भी डाली गई थी। ताकि आंदोलनकारी किसान आगे न बढ़ पाएं। यहां भी किसान बड़ी संख्या में हरियाणा में दाखिल होने में कामयाब हो गए। वहीं अभी हजारों की तादाद में किसान सीमा पर धरने पर बैठे हैं।
टोहाना बॉर्डर- टोहाना बॉर्डर पर भी किसानों को रोकने का प्रयास हुआ लेकिन रास्ते के सारे अवरोध हटा किसान आगे बढ़ गए। डबवाली और सद्दोपुर बॉर्डर से भी किसान हरियाणा में घुसने में कामयाब हुए। वहीं भिवानी में किसान मुंढाल बॉर्डर से दाखिल हुए।