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Karva Chauth: कैसे हुई शुरुआत, सिर्फ सवा घंटे का समय, व्रत और पूजन विधि
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 08 Oct 2017 10:56 AM IST
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आज करवा चौथ का त्योहार है। महिलाओं ने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए व्रत रखा है, जानिए कैसे हुई इसकी शुरुआत। कैसे करें पूजन और व्रत की पूरी विधि...
karva
सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र बताते हैं कि कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवाचौथ का व्रत रखा जाता है। सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत शिवजी के लिए रखा था। इसके बाद ही उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। इसलिए इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। महाभारत में पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी द्वारा भी इस व्रत को रखा गया था।
करवाचौथ
बीरेंद्र नारायण मिश्र बताते हैं कि एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ और देवताओं की हार होने लगी। इसके बाद भगवान ब्रह्मा ने कहा सभी देवताओं की पत्नियों को अपने पतियों के लिए व्रत रखने को कहा था। फिर कार्तिक माह में चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा और पतियों की विजय की कामना की। उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की विजय हुई।
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करवा चाौथ्ा
बीरेंद्र नारायण मिश्र बताते हैं कि रविवार को चार बजकर 58 मिनट पर तृतीया समाप्त हो रही है। चार बजकर 59 मिनट से चतुर्थी तिथि का शुभारंभ होगा। चंद्रमा रात आठ बजकर 13 मिनट पर निकलेगा। पूजा का मुहूर्त शाम 5.54 मिनट से शाम 7.10 मिनट तक शुभ रहेगा। नौ अक्तूबर दिन सोमवार को चतुर्थी तिथि दोपहर में दो बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो रही है।
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करवाचौथ
बीरेंद्र नारायण मिश्र बताते हैं कि करवा चौथ पर पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भालचंद्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। गेहूं अथवा चावल के 13 दानें हाथ में लेकर कथा सुननी चाहिए। मिट्टी के करवे में गेहूं, ढक्कन में चीनी एवं उसके ऊपर वस्त्र आदि रखकर सास, जेठानी को देना चाहिए। चांद निकलने के बाद महिलाएं छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं और चांद को जल अर्पित करती हैं। इसके बाद पुरूष पानी पिलाकर अपनी पत्नियों का उपवास पूरा करवाते हैं।