फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

पूर्व आर्मी चीफ का खुलासा, कारगिल युद्ध में भेजा गया था पुराना बारूद, तोप ने भी दिया था 'धोखा'

Sat, 14 Dec 2019 02:37 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 14 Dec 2019 02:37 AM IST
विज्ञापन
Kargil War, Third Military Literature Festival In Chandigarh
पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक - फोटो : अमर उजाला

साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध की यादें आज भी देशवासियों के दिलों में ताजा हैं। हमारे जाबांजों के शौर्य भरे किस्से हर किसी के जुबां पर होते हैं। युद्ध से जुड़े कई घटनाक्रमों के बारे में हम जानते हैं। तो वहीं समय-समय पर कई खुलासे होते रहते हैं। चंडीगढ़ में तीसरे मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। आइए जानते हैं इसके बारे में...

Kargil War, Third Military Literature Festival In Chandigarh
पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक - फोटो : अमर उजाला

सन 1999 में एलओसी पर लड़े गए कारगिल युद्ध के दौरान फौज के लिए पुराना बारूद भेज दिया गया था जिससे युद्ध रणनीति के दौरान गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी। मगर अंतत: यह निर्णय लिया गया इस बारूद का इस्तेमाल पूरे युद्ध के दौरान नहीं किया जाएगा। इसके अलावा भी कारगिल युद्ध जवानों को समय पर हथियारों और उपकरणों की भी काफी कमी खली थी। बावजूद इसके जवानों के हौसले ने इस जंग को जीतकर दिखाया। दरअसल, कारगिल युद्ध से पहले देश ने फौज के लिए ‘130 एमएम खींचा फील्ड गन’ के लिए बारूद बाहर से आयात हुआ था। आयात होने के बाद मालूम चला कि ये बारूद काफी पुराना लगभग सत्तर के दशक का है। उधर, युद्ध शुरू होने के बाद फील्ड गन के लिए ये बारूद सेना को सौंप दिया गया। मगर सेना के आला अफसरों को जब ये मालूम चला कि ये बारूद काफी पुराना है, तो युद्ध के दौरान ही बड़ी टेंशन खड़ी हो गई। 

Kargil War, Third Military Literature Festival In Chandigarh
पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक

शुक्रवार को चंडीगढ़ के मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में सेना के पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक ने यह खुलासा करते हुए कहा चूंकि बारूद पुराना था, इसलिए युद्ध में इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया गया। मगर यह एक विडंबना से कम नहीं था। इसी तरह बाहर से कुछ नई तोपों भी मंगवाई गई थी, मगर बाद में मालूम चला कि सप्लाई नई तोपों की नहीं, बल्कि पुरानी तोपों की होगी। ऐसे में इसे भी रद्द कर दिया गया। जनरल मलिक ने कहा कि कारगिल युद्ध में सैन्य हथियारों व उपकरणों की कमी बहुत खली थी, दरअसल, ‘मेक इन इंडिया’ की असली जरूरत तो उस वक्त महसूस हुई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Kargil War, Third Military Literature Festival In Chandigarh
मिलिट्री फेस्ट चंडीगढ़

सैन्य उपकरणों की आवश्यक खरीद आज भी आसान नहीं है। सेना को देश में ही निर्मित हथियार व उपकरण यदि समय पर मिल जाएं तो हमें इसके लिए बाहरी देशों पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा। पूर्व आर्मी चीफ ने कहा कि वह कल्पना नहीं कर सकते कि इस तरह की जरूरी खरीद किस तरह सिस्टम में उलझकर रह जाती है और इस तरह के सवाल हमेशा खड़े रहेंगे।

सेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान के पूर्व जीओसी-इन-सी एवं रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल अरुण साहनी का कहना है कि आज की मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) में भी बड़े सुधार की जरूरत है। उनके अनुसार आज सेना के समक्ष कई बड़ी चुनौतियां हैं, ऐसे में यदि हम पुराने ढर्रे पर ही चलते रहेंगे, तो सेना को अपग्रेड करने में न केवल मुश्किल होगा, बल्कि हमेशा बाहरी मुल्कों पर आश्रित रहना पड़ेगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि आज डीआरडीओ को और मजबूत व अपग्रेड किया जाए। यहां विशेषज्ञ सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर ही फोकस करें।

विज्ञापन
Kargil War, Third Military Literature Festival In Chandigarh
मिलिट्री फेस्ट चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ राहुल बेदी कहते हैं कि करगिल युद्ध में पुराना बारूद भेजना, नई तोपों की डील पर पुरानी तोपें देना, ऐसा तभी होता है, जब आप दूसरे देशों पर आश्रित रहते हैं। देश में ही ज्यादा से ज्यादा डिफेंस इक्यूपमेंट बनने चाहिए। देश में हथियारों व सैन्य उपकरणों का निर्माण सरल व पारदर्शी होना चाहिए। ऐसी खरीद को बहुत सारे विभागों के बीच न उलझाकर इसके लिए एक ही केंद्रित विभाग हो, जिससे खरीद लटकने की बजाए जल्द सिरे चढ़े और भारतीय सेना को समय पर अत्याधुनिक हथियारों व उपकरणों से अपग्रेड किया जा सके।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed