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पूर्व रॉ चीफ बोले- अनुच्छेद 370 हटाने से कुछ नहीं होगा, कश्मीर और करतारपुर कॉरिडोर पर कही बड़ी बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 14 Dec 2019 01:45 AM IST
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पूर्व रॉ चीफ एएस दुल्लत
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पूर्व रॉ चीफ एएस दुल्लत ने कहा कि आतंकवाद और आईएसआई को यदि देश में आना है तो उसके लिए करतारपुर कॉरिडोर ही उनके लिए बड़ा जरिया नहीं है। देश में और भी कई ऐसे रास्ते हैं, जहां से आतंकवाद दाखिल हो रहा है। इसके लिए करतारपुर कॉरिडोर का नाम उछालना उचित नहीं है। करतारपुर कॉरिडोर दोनों देशों का एक बेहतर फैसला है, इसकी सराहना होनी चाहिए।
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- फोटो : फाइल फोटो
आर्मी मिलिट्री फेस्ट में आए पूर्व रॉ चीफ ने बातचीत में शायराना अंदाज में कहा कि ‘साडियां राहां भी औखियां सन, कुछ शहर दे लोक भी जालम सन और कुछ सानू वी मरन दा शौंक सी...’ आज कश्मीर का बिल्कुल यही हालात है। उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या का हल सिर्फ फौज नहीं है। अनुच्छेद 370 हटाने से कोई बड़ा बदलाव हो जाए, ऐसा दिख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि ‘यह अनुच्छेद खोखला है, ठीक है इसे खत्म कर दिया है, लेकिन स्टेट खत्म हो गई, इसके साथ घाटी में और भी बहुत कुछ हो गया है, चलो वहां जब ठीक होगा तो हो जाएगा।’
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Military Literature Festival
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व रॉ चीफ ने कहा कि कश्मीर से यदि अनुच्छेद 370 हटाना ही था तो कश्मीर के वे नेता जिन्हें नजरबंद करके रखा है, उन्हें विश्वास में लेकर इसे हटा दिया गया होता तो शायद बहुत कुछ ठीक रहता। दुल्लत ने कहा कि घाटी में आतंकवाद अप एंड डाउन चलता रहता है, लेकिन कश्मीरी आज बंदूक से बहुत तंग आ चुका है।
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- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2001 में जब 9/11 हुआ था तभी कश्मीरी समझ गए थे कि बंदूक से सिर्फ और सिर्फ बर्बादी ही होगी। कश्मीरी आज भी बातचीत को तैयार है और हमेशा से रहा है, उसे सिर्फ और सिर्फ घाटी में अमन और तरक्की चाहिए। उन्होंने कहा कि आज कश्मीरियों को यह भी समझ में आ चुका है कि पाकिस्तान उनका रहनुमा कभी नहीं बन सकता।
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- फोटो : अमर उजाला
कश्मीरियों को मालूम है कि यदि जंग हुई तो पाकिस्तान खुद को नहीं बचा सकता तो ऐसे में वो कश्मीर को क्या बचाएगा। उनके अनुसार कश्मीरियेां को आज पाकिस्तान पर कोई भरोसा नहीं है लेकिन दिक्कत यह है कि कश्मीरियों को हमारे पर भी भरोसा पूरी तरह से नहीं है। मैं यह नहीं कह रहा कि कश्मीरियों का भरोसा देश पर बिल्कुल नहीं है, बस जितना होना चाहिए, उतना नहीं है।
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