आज हम आपको एक ऐसे स्कूल प्रिंसीपल के बारे में बताने जा रहे है, जिसने सरकारी स्कूल को ऐसा बना दिया कि हर बच्चा 'इंगलिशमैन' बन गया।
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Teacher Jaipal dahiya
- फोटो : अमर उजाला
गुरु ही होता है जो कुम्हार की तरह कच्ची मिट्टी को तराश कर घड़े को अमूल्य पात्र बना देता है। कुछ इसी तरह का काम कर रहे हैं सांघी के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य जयपाल दहिया।
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प्राचार्य जयपाल दहिया अपने कार्य के साथ व्यवहार में भी सरल हैं। स्कूल को अपना परिवार मानते हैं। सुबह 7:45 बजे स्कूल पहुंचने के बाद छुट्टी के बाद भी रुके रहते हैं। कभी स्कूल से छुट्टी नहीं लेते हैं।
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अमूमन सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी हाई स्कूल में आने के बावजूद अंग्रेजी भाषा के बेसिक से अंजान रहते हैं। लेकिन सांघी के स्कूल में 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के साथ ऐसा नहीं है। इन बच्चों की अंग्रेजी भाषा पर पकड़ बनाने के लिए स्कूल में रोजाना 600 अंग्रेजी के समाचार पत्र मंगाये जाते हैं।
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दहिया ने अपने वेतन और सहयोगी संस्थाओं की मदद से स्कूल के बुनियादी ढांचे को बदल दिया। साथ ही छात्र संख्या, बोर्ड परिणाम और विद्यार्थियों को सुविधाएं देने में निजी स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया।