पूर्व नौसेना कमांडर कुलभूषण जाधव को सुनाई गई फांसी की सजा पर अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। पढ़िए इसके पीछे पाकिस्तान की क्या चाल है...
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पाकिस्तानी रिटायर्ड लैफ्टिनैंट कर्नल मोहम्मद हबीब जहीर
- फोटो : File Photo
दरअसल, कुलभूषण जाधव को सुनाई गई फांसी की सजा को पाकिस्तानी मीडिया में एक पाकिस्तानी रिटायर्ड लैफ्टिनैंट कर्नल मोहम्मद हबीब जहीर की भारत-नेपाल बॉर्डर पर कुछ दिन पहले ‘गुम’ होने की घटना के साथ जोड़ा जा रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया में ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि जहीर की गुमशुदगी के पीछे भारतीय गुप्तचर एजैंसियों का हाथ है। जहीर पाकिस्तानी सेना से 2014 में रिटायर हुआ बताया जाता है। उसके बाद उसने पाकिस्तान की आई.एस.आई. एजैंसी के लिए काम करना शुरू कर दिया।
नेपाल में भी जहीर भारत के साथ लगते बॉर्डर पर किसी गुप्त मिशन पर आया था लेकिन वहां से वह अचानक गायब हो गया। दिल्ली से प्राप्त होने वाले समाचारों के अनुसार जैसे ही पाकिस्तानी फौज को जहीर के गायब होने की खबर मिली तो उसने तुरंत एक मिलिट्री कोर्ट के जरिए कुलभूषण जाधव को सजा-ए-मौत देने की घोषणा कर दी।
ऐसा पाकिस्तान ने इसलिए किया क्योकि उसे डर था कि भारत जहीर को दुनिया के सामने पेश कर पाकिस्तान पर कुलभूषण जाधव को तुरंत रिहा करने का दबाव बनाएगा।