17 साल से पैर काम नहीं करते। 31 ऑपरेशन हो चुके हैं और 183 टांके लगे। उसके बावजूद ऐसा इतिहास रचा कि देश ने उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा।
2 of 10
पद्मश्री मिलने के बाद दीपा बोलीं
ये कहानी है देश की उस बहादुर बेटी की, जिसने व्हीलचेयर पर होने के बावजूद हिम्मत नहीं छोड़ी। खुद को मोहताज नहीं बनने दिया और एक ऐसी पहचान कायम की, जो दुनिया के लिए मिसाल बन गई। पैरा ओलंपिक में देश को मेडल दिलाकर इतिहास रचा था और उसकी इस उपलब्धि को लिए अब उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। इनका नाम है, दीपा मलिक।
30 सितंबर 1970 को हरियाणा के सोनीपत में भैंसवाल गांव में जन्मीं दीपा मलिक को 29 साल की उम्र में लकवा मार गया था। उनके कमर के नीचे का पूरा हिस्सा पैरालाइज्ड है। रीढ़ में ट्यूमर होने की वजह से वह चल नहीं पाती हैं। 17 साल से व्हील चेयर पर हैं, लेकिन दीपा दर्द और हालातों को मात देकर वो इस मुकाम तक पहुंचीं। दीपा का सिल्वर मेडल भारत का पैरालंपिक खेलों में तीसरा मेडल है।
दीपा कर्नल बीके नागपाल की बेटी हैं। उनकी शादी भी एक फौजी से हुई। उनके पति सेना अधिकारी कर्नल विक्रम सिंह हैं। उनकी दो बेटियां हैं। दीपा की बेटियों का नाम देविका और अंबिका है। रियो पैरालंपिक गेम्स में दीपा मलिक ने देश के लिए शॉटपुट इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही वे इन गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पैरा एथलीट भी बन गईं।
दीपा ने 36 साल की उम्र में अपने खेल की शुरुआत की थी। दीपा को शॉटपुट के अलावा भी कई गेम्स में महारथ हासिल है। वे जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो, स्विमिंग और मोटर स्पोर्ट्स से भी जुड़ी हुई हैं। एक स्पोर्ट्स पर्सन होने के अलावा दीपा एक एंटरप्रेनर भी रही हैं। उन्होंने 7 सालों तक कैटरिंग और रेस्टोरेंट बिजनेस भी किया है। इसके अलावा दीपा एक मोटिवेशनल और इंस्पिरेशनल स्पीकर भी हैं।