अपने बेटे और बेटी को इंटरनेशनल प्लेयर बनाना चाहता था कबड्डी खिलाड़ी, लेकिन वक्त ने रुख बदला और ऐसी घटना हुई कि सपने पल भर में टूट गए।
करनाल में हुए गैंगवार में मारा गया अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुलाब सिंह बस्तली मौत के बाद अपने पीछे अपने बूढ़े मां-बाप महेंद्र सिंह और राजदुलारी सहित अपनी पत्नी उषा और बेटे रक्षित और बेटी वैश्वी को छोड़ गया है। पंद्रह साल की उम्र से ही कबड्डी का शौक रखने वाला गुलाब अपने बेटे और बेटी को कबड्डी का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाना चाहता था। बेटी नर्सरी और बेटा एलकेजी कक्षा में पढ़ता है।
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करनाल में गैंगवार में कबड्डी खिलाड़ी की हत्या
गुलाब ने अभी से दोनों बच्चों में कबड्डी के प्रति जुनून पैदा कर दिया था। बेटा अभी से अपने पापा के साथ कबड्डी कबड्डी करने लगा था। परिवार की आर्थिक स्थित नाजुक होने के कारण दो साल पहले गुलाब ने कबड्डी खेलना छोड़ दिया था और वह शराब के ठेके पर नौकरी करने लगा था। ग्रामीणों का कहना है कि गुलाब ने उनके गांव की पहचान पूरे देश में बनाई है। गांव को गुलाब के नाम से जाना जाता है।
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गुलाब की प्राइवेट नौकरी से ही उसके परिवार का गुजारा चलता था। गुलाब के दो भाई हैं। इनमें से एक की 22 साल पहले मौत हो गई थी। अब मलखान और गुलाब अलग-अलग परिवार के साथ रहते थे। गुलाब की मौत के बाद उसके 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता और माता, गुलाब की पत्नी उषा और छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। पहलवान की मौत से बस्तली सहित आस-पास के गांवों में शौक की लहर है।
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करनाल में गैंगवार में कबड्डी खिलाड़ी की हत्या
गुलाब सिंह राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित करवाता रहता था। 4-5 नवंबर को भी गांव में एक कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन गुलाब सिंह ने करवाया था। अब 2018 में गांव बस्तली में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित करवाने की तैयारी थी। इसके लिए उसने पूरी रणनीति तैयार कर ली थी। गुलाब सिंह कहता था कि गांव बस्तली की कबड्डी के नाम से राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान बनानी है।