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किसान मां-बेटे की सुसाइड का सच, कर्ज नहीं कुछ और, देखिए तस्वीरों में

Tue, 10 May 2016 05:40 PM IST
भूपेंदर सिंह भाटिया, अमर उजाला, बरनाला से लौटकर
भूपेंदर सिंह भाटिया, अमर उजाला, बरनाला से लौटकर Updated Tue, 10 May 2016 05:40 PM IST
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inside story about farmer son and mother suicide in barnala case
बरनाला में खुदकुशी करने वाले मां-बेटे की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

बरनाला में गांव जोधपुर के किसान बलविंदर सिंह और उसकी मां बलवीर कौर की खुदकुशी का कारण कर्ज नहीं था। इसकी असल वजह थी-आढ़ती का लालच। वह पैसे वापसी के बजाय जमीन हथियाना चाहता था। दरअसल, बलविंदर के पिता दर्शन सिंह के पास 15 कनाल से ज्यादा जमीन थी। लगभग 12-13 साल पहले उन्होंने डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिया था। जो चुका न पाने के कारण आढ़ती ने कोर्ट के आदेश पर मालिकाना हक पा लिया था। 

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बरनाला में खुदकुशी करने वाले मां-बेटे की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

घटना के दिन कुछ लोग बीच-बचाव कर कर्ज की कुल राशि डेढ़ लाख का दस गुना ब्याज यानी 15 लाख रुपये दिलवाने को तैयार थे, लेकिन आढ़ती जमीन पर कब्जा करने पर अड़ा रहा। बलविंदर के रिश्तेदारों के अनुसार उन्होंने और गांव के लोगों ने आढ़ती से अनुरोध किया था कि जमीन का एक हिस्सा बेचकर वह 15 लाख रुपये दिलवाएंगे, लेकिन आढ़ती की नजर 15 किले जमीन पर लगी थी और वह नहीं माना। इसी दौरान पुलिस के सामने मां बेटे ने पेस्टिसाइड पीकर मौत को गले लगा लिया।

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बरनाला में खुदकुशी करने वाले मां-बेटे का घर - फोटो : amar ujala
इस घर को अब संभाले कौन: गांव जोधपुर के किसान बलविंदर सिंह के निवास पर इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। इसी जगह सात दिन पहले बलविंदर (30) और उसकी मां बलवीर कौर (60) ने पेस्टिसाइड पीकर जान दे दी थी। बलविंदर का भाई और उसकी पत्नी मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं। अब इस घर को संभालने वाला कोई नहीं। घर के बरामदे में कोने पर पड़ी एक खटिया पर बलविंदर का भाई कुछ न कुछ बुदबुदाता रहता है। मां और भाई की मौत ने उसे गहरा आघात पहुंचाया है। यही कारण है कि उस घर में पहुंचने वाले हर व्यक्ति से वह उलझ जाता है।
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बरनाला में किसान बेटे के साथ खुदकुशी करने वाली मां की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

आसपास की महिलाएं बीच-बचाव कर उसे शांत करवाती हैं। हाल ही में गांव वालों के जोरदार प्रदर्शन के बाद सरकार ने मौके पर ही परिवार को छह लाख रुपये की राशि मुआवजे के तौर पर दी लेकिन बलविंदर के भाई-भाभी इस मुआवजे को संभालने की स्थिति में नहीं हैं। अब परिवार का सारा दारोमदार पड़ोस में रहने वाले बलविंदर के चाचा और ताया पर आ गया है। रिश्तेदारों ने बताया कि किसान बलविंदर सिंह के पिता गांव के बड़े जमींदार थे और ऐसा नहीं था कि वह आढ़ती का कर्ज नहीं चुकाना चाहता था। इसके लिए बलविंदर ने कुछ साल पहले भी अपनी जमीन का एक हिस्सा बेचा था। उस समय भी आढ़ती के साथ समझौता न होने पर मामला अधर में लटक गया था। समय बीतता गया और कर्ज के ब्याज की राशि बढ़ती चली गई। 

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