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इतिहास रचने वाली हॉकी इंडिया की कैप्टन ने खोले फाइनल जीत के राज
अंकित चौहान/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Tue, 08 Nov 2016 09:11 AM IST
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भारतीय महिला हॉकी टीम कैप्टन दीपिका ठाकुर
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भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार एशियन चैपियंस ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा। कैप्टन ने एक इंटरव्यू के दौरान इसके पीछे का राज खोला।
भारतीय महिला हॉकी टीम कैप्टन दीपिका ठाकुर
पहली बार एशियन चैंपियंस ट्राफी जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम काफी उत्साहित है। ट्राफी जीतने के लिए टीम ने पुरानी गलतियों को दूर करके नई योजना बनाई। फाइनल से ठीक पहले चीन से हार मिली। इस दबाव के बावजूद टीम का मनोबल नहीं टूटने दिया। फाइनल में योजना के तहत हर खिलाड़ी ने बेहतरीन खेली।
भारतीय महिला हॉकी टीम कैप्टन दीपिका ठाकुर
भारत को एशिया चैंपियन बनाने में निर्णायक गोल करने वाली दीपिका ठाकुर ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में टीम की जीत की योजना को साझा किया। एशियन चैंपियंस ट्राफी से पहले महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक खेला था। जहां पेनाल्टी कार्नर को गोल में न बदल पाना टीम की सबसे बड़ी कमजोरी थी। टीम ने इस कमजोरी को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा प्रैक्टिस की।
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भारतीय महिला हॉकी टीम कैप्टन दीपिका ठाकुर
भारत को एशिया चैंपियन बनाने में निर्णायक गोल करने वाली उप कप्तान दीपिका ठाकुर कहती हैं कि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में उनका फोकस पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलना था। फाइनल से ठीक पहले मैच में चीन से 2-3 से हार मिली थी। उसी टीम से फाइनल होने से टीम के खिलाड़ियों पर दबाव था। टीम के खिलाड़ियों का मनोबल न टूटे इसके लिए फाइनल खेलने से पहले कोच और सभी खिलाड़ियों ने मीटिंग की।
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भारतीय महिला हॉकी टीम कैप्टन दीपिका ठाकुर
दीपिका ने बताया कि इसमें योजना बनाई गई कि चीन को हम बड़ी आसानी से हरा सकते हैं। यह तब संभव होगा, जब हम ग्राउंड गोल की जगह पेनाल्टी कार्नर पर फोकस करें। दीपिका ने बताया कि योजना के तहत तय किया गया कि ग्राउंड गोल भले ही नहीं मिले, लेकिन पेनाल्टी कार्नर किसी भी हालत में खाली नहीं जाना चाहिए। ऐसा होता है तो हमारी जीत पक्की होगी। लेकिन आखिरी समय में मिला पेनाल्टी कार्नर खाली जाता दिखा तो रिबाउंड पर शॉट लगाकर गोल कर दिया।