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...अगर मान लेते ये सुझाव, तो न होता 1947 का बंटवारा, न पाकिस्तान बनता और न ऐसी दुश्मनी होती

Tue, 11 Dec 2018 09:15 AM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Dec 2018 09:15 AM IST
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Indian Military Literature Festival 2018, Secret Revealed about 1947 Partition India Pakistan
स्वतंत्र भारत की तस्वीरें - फोटो : defenceforumindia.com
अगर महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी इस एक सुझाव को अपना लेते तो न 1947 का बंटवारा होता। न खून खराबा होता और न ही लाशें बिखरतीं। न भारत- पाकिस्तान बनते और न ही दुश्मनी का ऐसा माहौल होता।
Indian Military Literature Festival 2018, Secret Revealed about 1947 Partition India Pakistan
KASHMIR 1947 - फोटो : file photo
महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी सतलुज के पूर्व में विस्तार न करने की नीति का पालन करते तो सिख जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान के अलावा उत्तर पश्चिम सीमा और गिलगिट के पूरे भूखंड को बनाए रख सकते थे। ऐसे में उस समय देश को शायद विभाजन का सामना नहीं करना पड़ता। यह निष्कर्ष ‘टू बैटल्स फार सरवाईवल-फिरोज शाह 1845 एंड चिल्लियांवाला 1849’ सेशन में निकाला गया।
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KASHMIR 1947 - फोटो : file photo
पंजाब के मुख्यमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल, ब्रिटेन के सैन्य इतिहासकार अमरपाल सिंह सिद्धू और डॉ. इंदु बंगा ने इन दो महत्वपूर्ण लड़ाइयों के संबंध में कई दृष्टिकोण साझा किए। इन लड़ाइयों के रणनीतिक महत्व पर बात करते हुए शेरगिल ने कहा कि ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा छिपाए जाने के बावजूद अंग्रेजों ने वास्तव में इन लड़ाइयों को नहीं जीता था, पर उन्होंने इसे अपने रिकॉर्ड में लिया।
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1947 का गदर
शेरगिल ने बताया कि अजीब अस्पष्ट कारणों से फिरोज शाह युद्ध में लाल सिंह भाग गया था और शेर सिंह ने चिल्लियांवाला युद्ध की अगुवाई करने के बाद इसे जीत कर सौंप दिया। जनरल शेरगिल ने दु:ख जताया कि महाराजा रणजीत सिंह की सशस्त्र सेनाओं के एकीकरण की नीति को उनकी मृत्यु के बाद त्याग दिया गया। उनके उत्तराधिकार के लिए युद्ध से उनकी सेना का मनोबल और अनुशासन भंग हो गया।
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1947 भारत पाक युद्ध - फोटो : File Photo
शेरगिल ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह एक दूरदर्शी युद्ध रणनीतिकार थे। 1830 से 1839 तक उनकी सेना, जिसमें मुख्य रूप से घुड़सवारी सेना थी इसके बाद में तोपखाने वाली सेना भी शामिल हुई और फ्रांसीसी अधिकारियों को उनकी सेना को पेशेवर प्रशिक्षण देने के लिए शामिल किया गया। शेरगिल ने कहा कि रणजीत सिंह की मौत के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को पंजाब पर अधिकार करने का मौका मिला गया और उन्होंने महसूस किया कि अब कोई भी योग्य उत्तराधिकारी नहीं है।
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