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65 युद्ध के हीरो ब्रिगेडियर संत नहीं रहे, अंतिम संस्कार की तस्वीरें
Fri, 11 Dec 2015 04:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Updated Fri, 11 Dec 2015 04:59 PM IST
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1965 युद्ध के हीरो रहे डबल महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर संत सिंह देश के पहले आर्मी आफिसर थे, जिनके नाम पर कैन्टोनमेंट का नाम रखा गया था। वे नहीं रहे। देखिए, उनकी साहस गाथा और अंतिम यात्रा। (रिपोर्ट: आशीष वर्मा/चंडीगढ़)
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चंडीगढ़ में रहने वाले ब्रिगेडियर संत सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध, 1948, 1965 व 1971 के युद्ध में हिस्सा लेकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। इसके अलावा उन्होंने 1962 में चीन के साथ युद्ध में हिस्सा लिया था। वे हिंदुस्तान के उन चुनिंदा आर्मी अफसर में से एक हैं, जिन्हें दो बार 1965 और 1971 में पाकिस्तान के युद्ध में महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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ब्रिगेडियर संत सिंह के नाम की एक और महावीर चक्र और परमवीर चक्र के लिए सिफारिश की गई थी। मेंढार सेक्टर में उन्होंने बहुत ज्यादा काम हुआ है। उनके नाम पर मेंढार सेक्टर की एक कैन्टोनमेंट का नाम रखा गया है। यह पहली बार होगा कि किसी सैन्य अफसर के नाम पर कैन्टोनमेंट हो।
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1965 के युद्ध में उन्होंने मेंढर सेक्टर में अपने शौर्य का प्रदर्शन किया था। इसी सेक्टर में स्थित कैन्टोनमेंट का नाम ब्रिगेडियर संत सिंह पर रखा गया है। युद्ध के दौरान उन्हें आपरेशन रिडल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हाल ही में 1965 युद्ध के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया था कि दो नवंबर की रात को पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर की पहाड़ी में दुश्मनों को खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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बकौल, संत सिंह वे देर रात तक अपनी टीम के साथ आगे बढ़ते रहे, जब वे दुश्मनों के नजदीक पहुंचे तो दुश्मनों को पता चल गया और गोलीबारी शुरू कर दी, लेकिन संत सिंह डरे नहीं वे दुश्मनों की पोस्ट में पहुंच गए और पाक फौजियों के साथ सीधी लड़ाई की। मात्र कुछ मिनट बाद उन्होंने दुश्मन की पोस्ट पर भारत का झंडा लहरा दिया। इसी तरह से 1971 की युद्ध में नार्थ बांग्लादेश की ओर भारत की ओर से मोर्चा संभाला था।
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