लद्दाख की 'जांस्कर नदी' के अचानक पिछलने से वहां मौजूद टैकर्स (पैदल यात्रा एडवेंचर करने वाले) समेत अन्य लोगों की जान आफत में आ गई है। ये ट्रैकर्स इस इलाके में मशहूर ‘चादर ट्रैक’ एरिया में पैदल ट्रैकिंग के लिए पहुंचे हुए थे। सूचना मिलते ही इंडियन एयरफोर्स के एडवांस लाइट हेलीकाप्टरों ने मोर्चा संभाला और वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू कर दिया है। दो दिनों में 107 से अधिक लोगों को इस क्षेत्र से सकुशल निकाला जा चुका है। जिसमें 50 टैकर्स को गुरुवार को हेलीकॉप्टरों के जरिये निकाला गया।
सकुशल निकाले गए टैकर्स में फ्रांस के दो (एक पुरुष, एक महिला) व चीन के सात (चार पुरुष, तीन महिला) शामिल हैं। कई कुली भी वहां फंसे थे। उन्हें भी हेलीकॉप्टरों की मदद से निकाला जा रहा है। दरअसल, ये लोग यहां ‘चादर ट्रैक’ एरिया में ट्रैकिंग एडवेंचर के लिए आए हुए थे। अत्यधिक बर्फ की वजह से यहां बहने वाली जांस्कर नदी भी जमी हुई थी। मगर अचानक नदी का एक बड़ा हिस्सा पिघलकर टूट गया।
ऐसी स्थिति में टैकर्स के लिए इस नदी के शेष मजबूत हिस्से को पार कर बहुत जोखिम भरा था। इसी वजह से ये टैकर्स, कुली व अन्य लोग वहीं फंस गए। यह सूचना किसी तरह जांस्कर नदी के पास ही स्थित छोटे से शहर पादुम तक पहुंचाई गई और फिर वहां से इंडियन एयरफोर्स से मदद मांगी गई।
एयरफोर्स ने उठाया बड़ा जोखिम, मुश्किल थी हेलीकॉप्टरों की लैडिंग
सूचना मिलते ही एयरफोर्स के एडवांस लाइट हेलीकॉप्टरों ने इस इलाके के लिए उड़ान भर ली। एयरफोर्स के लिए ऐसे इलाके में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि जांस्कर नदी का बड़ा हिस्सा पिघलने लगा था। मगर लोगों को सुरक्षित वहां से निकालने के लिए एयरफोर्स ने नदी के किनारे पर हेलीकॉप्टरों की सावधानी से लैंडिंग करवाई और ट्रैकर्स समेत अन्य लोगों वहां से निकालने का काम किया।
इन ट्रैकर्स को सकुशल एयरफोर्स स्टेशन पहुंचाया गया। वहीं इन लोगों के लिए एक कैंप की व्यवस्था भी एयरफोर्स ने की है। जहां इन सभी लोगों को चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। अपने इस ऑपरेशन में एयरफोर्स ने सिविल एडमिनस्ट्रेशन वहां मौजूद इंडियन आर्मी की यूनिटों और लोकल डिजास्टर रीलिफ टीमों से भी लगातार समन्वय बनाए रखा।