शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह के पार्थिव शरीर को मिलिट्री एरिया से पूरे फौजी सम्मान के साथ जब गांव सील लाया गया तो बोले सो निहाल के जयकारे और शहीद मनदीप सिंह अमर रहे के नारे गूंजने लगे। एक काफिले के रूप में शहीद का पार्थिव शरीर गांव लाया गया।
धार्मिक रीति रिवाजों, फौजी और राजकीय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गई।शहीद के 11 साल के बेटे जोबनप्रीत सिंह ने चिता को मुखाग्नि दी। शहीद के परिवार में बुजुर्ग मां शकुंतला कौर, पत्नी गुरदीप कौर, 11 साल के बेटे और 15 साल की बेटी महकप्रीत कौर व तीन बहनें हैं।
अंतिम संस्कार से पहले शहीद की माता, पत्नी व बच्चों ने वीर सपूत को सलामी दी। इससे पहले शहीद के पार्थिव शरीर को दस्तार बांधी गई।
अंतिम संस्कार के मौके पर भारतीय सेना ने मातमी धुन बजाई और जवानों ने हथियार उल्टे कर गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए फायरिंग कर सलामी दी। सेना के अधिकारियों ने तिरंगे को शहीद की पत्नी व बच्चों को सौंपा। पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने शहीद को श्रद्धा के फूल भेंट किए।
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शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
गलवां घाटी में शहीद मनदीप सिंह पटियाला के गांव सील के रहने वाले थे। मनदीप सिंह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पत्नी गुरदीप कौर ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पति का सपना था कि उनके बच्चे बड़े अफसर बनें लेकिन अब उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा।
यह कहकर वह बिलख पड़ीं। मनदीप कुछ दिन पहले ही छुट्टी काटकर लेह-लद्दाख में यूनिट 3 आर्टिलरी मीडियम में गए थे। मनदीप सिंह अपनी यूनिट में गनर इंस्ट्रक्टर (एआईजी) थे। 20 मार्च 1980 में जन्मे शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह 24 दिसंबर 1997 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। मनदीप सिंह के दोनों बच्चों हैं।