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चीनी सैनिकों से झड़प में पंजाब के चार सपूतों ने दिया बलिदान, पढ़ें- इनकी शहादत की कहानी

Wed, 17 Jun 2020 08:29 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 17 Jun 2020 08:29 PM IST
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China-India border dispute, Four jawan of Punjab martyred in Galwan valley
पंजाब के शहीद। - फोटो : फाइल फोटो

लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में देश के 20 वीर सपूतों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इन शहीदों में चार नाम पंजाब के जवानों के हैं। पंजाब के शहीदों में गुरदासपुर के सतनाम सिंह, सुनाम के गुरविंदर सिंह, मानसा के गुरतेज सिंह और पटिलाला के शामिल हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में...

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शहीद सतनाम सिंह - फोटो : फाइल फोटो

गुरदासपुर के गांव भोजराज का बेटा सतनाम सिंह (42) ने भी चीनी सैनिकों से झड़प में देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। शहादत की खबर से गांव का माहौल गमगीन है और चीन के खिलाफ गुस्सा है। सतनाम सिंह की शहादत की खबर अभी माता-पिता, पत्नी और बच्चों को नहीं दी गई है। शहीद नायब सूबेदार सतनाम सिंह 3 मीडियम रेजिमेंट लद्दाख में तैनात थे। सतनाम सिंह का जन्म 18 जनवरी 1979 को हुआ और उन्होंने 23 अगस्त 1995 को आर्मी ज्वाइन की थी। शहदी सतनाम सिंह के भाई सुखचैन सिंह भी फौज में सूबेदार हैं। वह इस वक्त हैदराबाद से छुट्टी पर घर आए हैं।

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शहीद गुरविंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब के सुनाम के गांव तोलावाल निवासी गुरविंदर सिंह ने भी सीमा की रक्षा करते हुए बलिदान दिया है। घरवालों को सेना ने सुबह साढ़े बजे शहादत की खबर दी है। शाम तक शहीद गुरविंदर सिंह की शहादत के बारे में मां चरणजीत कौर को बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सका। केवल यही बताया गया कि गुरविंदर चीनी सेना के हमले में गंभीर जख्मी हो गए हैं और जल्द ठीक होकर लौटेगा। गुरुवार शाम तक शहीद गुरविंदर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा। दो भाई व एक बहन में गुरविंदर सिंह सबसे छोटे थे। करीब तीन महीने पहले ही उनकी सगाई हुई थी और नंवबर में शादी होनी थी। गुरविंदर सिंह अभी दो साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे।

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शहीद गुरतेज सिंह - फोटो : फाइल फोटो

गलवां घाटी में चीनी सैनिक के साथ हुई हिंसक झड़प में मानसा के गांव बीरेवाला डोगरा का सैनिक गुरतेज सिंह (23) पुत्र विरसा सिंह भी शहीद हुए हैं। तीन भाइयों में सबसे छोटे गुरतेज सिंह करीब दो साल पहले फौज में भर्ती हुए थे। फौज में ट्रेनिंग के बाद सिख रेजिमेंट में पहली बार लेह-लद्दाख में ड्यूटी लगी थी। पिता ने बताया कि फौज में भर्ती होने की ख्वाहिश गुरतेज की बचपन से थी। आखिरी बार 20 दिन पहले पिता की बेटे से बात हुई थी। 

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शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

पटियाला के गांव सील के नायब सूबेदार मनदीप सिंह गलवां घाटी में शहीद हो गए हैं। मनदीप सिंह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पत्नी गुरदीप कौर ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पति मनदीप सिंह का सपना था कि उनके बच्चे बड़े अफसर बनें लेकिन अब उनके बच्चों के भविष्य का क्या होगा। यह कहकर वह बिलख पड़ीं। गुरदीप ने बताया कि लॉकडाउन के कारण मनदीप कुछ दिन पहले ही छुट्टी काटकर लेह-लद्दाख में यूनिट 3 आर्टिलरी मीडियम में गए थे। मनदीप सिंह अपनी यूनिट में गनर इंस्ट्रक्टर (एआईजी) थे। 20 मार्च 1980 में जन्मे शहीद नायब सूबेदार मनदीप सिंह 24 दिसंबर 1997 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। मनदीप सिंह के दोनों बच्चों हैं।

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