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स्वतंत्रता दिवस: देखिए, यहां शहीदों की याद में साल में एक बार ट्रेन चलती है

Tue, 15 Aug 2017 08:48 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 15 Aug 2017 08:48 AM IST
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Independence Day, hussainiwala border, last railway station of india
हुसैनीवाला बॉर्डर
70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देखिए भारत में एक ऐसी जगह है, जहां साल में केवल एक दिन आजादी की लड़ाई में देश पर कुर्बान होने वालों के लिए ट्रेन चलती है। 
Independence Day, hussainiwala border, last railway station of india
हुसैनीवाला बॉर्डर
फिरोजपुर से लेकर हुसैनीवाला बॉर्डर तक स्पेशल ट्रेन 10 किलोमीटर का सफर तय करती है। एक समय में ये रेल लाइन हुसैनीवाला से होकर लाहौर तक जाती थी पर पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान यह रेल मार्ग बंद कर दिया गया। यहां सतलुज दरिया पर बने रेल पुल को भी तोड़ दिया गया। अब फिरोजपुर से हुसैनीवाला में ही आकर रेल लाइन खत्म हो जाती है। रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर यहां लिखा गया है - द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे।
Independence Day, hussainiwala border, last railway station of india
हुसैनीवाला बॉर्डर
पूरे साल में एक दिन, केवल 23 मार्च को फिरोजपुर से एक स्पेशल ट्रेन बार्डर के लिए चलती है। गौरतलब है कि फिरोजपुर शहर से 10 किलोमीटर दूरी पर बने हुसैनीवाला बॉर्डर पर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि है। इस समाधि पर 23 मार्च को हर साल मेला लगता है। शहीदी मेले में दूर-दूर से पर्यटक शामिल होते हैं। पिछले साल तो यहां के मेले में खुद पीएम मोदी आए थे।
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Independence Day, hussainiwala border, last railway station of india
हुसैनीवाला बॉर्डर
बहुत कम लोग जानते होंगे कि हुसैनीवाला स्थित समाधि स्थल 1960 से पहले पाकिस्तान के कब्जे में था। जन भावनाओं को देखते हुए 1950 में तीनों शहीदों की समाधि स्थल पाक से लेने की कवायद शुरू हुई। करीब 10 साल बाद फाजिल्का के 12 गांव व सुलेमान की हेड वर्क्स पाकिस्तान को देने के बाद शहीद त्रिमूर्ति से जुड़ा समाधि स्थल भारत को मिल गया।
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हुसैनीवाला बॉर्डर
सतलुज दरिया के करीब बने इस समाधि स्थल को अब पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। समाधि स्थल के आसपास ग्रीनरी क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां पार्क और झूले-फव्वारे लगाए गए हैं। शुक्रवार और रविवार को खास तौर पर सैलानियों की भीड़ होती है।
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