क्या आप जानते हैं कि जो गैस सिलेंडर यूज कर रहे हैं, वो एक्सपायरी डेट का हो सकता है। नहीं जानते हैं तो हम आपको बता रहे हैं, इसे जानने की तरीका।
एक रसोई गैस सिलेंडर की जिंदगी अधिकतम 10 साल होती है। उसके बाद निष्प्रयोज्य हो जाता है और अवधि समाप्त होने पर गैस रिफलिंग के बाद यह कभी भी फट सकता है। ऐसे में आपके घर में आने वाले सिलेंडर एक्सपायर डेट के हो सकते हैं, जो खतरनाक हैं। इसलिए जरूरी है कि जब भी सिलेंडर आए तो एक्सपायरी डेट की जांच जरूर कर लें।
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एलपीजी की कालाबाजारी
- फोटो : अमर उजाला
हर एलपीजी गैस सिलेंडर को इस्तेमाल करने की एक समयसीमा होती है। इस अवधि के बाद सिलेंडर की टेस्टिंग करवानी होती है। यदि टेस्टिंग में सिलेंडर इस्तेमाल करने लायक नहीं निकलता तो इसे मार्केट से हटा दिया जाता है। किसी भी नए सिलेंडर की टेस्टिंग 10 से 15 साल में करानी होती है। वहीं पुराने सिलेंडर की टेस्टिंग हर 5 साल में करवानी जरूरी है।
कहां होता है टेस्ट?
गैस सिलेंडर प्लांट में सिलेंडर की टेक्निकल जांच की जाती है। कई बार लोग सालों तक सिलेंडर का यूज नहीं करते। ऐसे में इस तरह के सिलेंडर की टेक्निकल जांच बहुत जरूरी हो जाती है। अगर जांच नहीं करवाई गई तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
ऐसे जांचें एक्सपायरी डेट
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम तीनों ही कंपनियों के एलपीजी सिलेंडर में तीन पत्तियां लगी रहती हैं। इसमें दो पत्तियों पर सिलेंडर का वजन और तीसरी पत्ती में कुछ नंबर लिखे होते हैं। यह वास्तव में सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है। आप एक्सपायरी वर्ष को समझ सकता है, लेकिन महीना समझने के लिए साथ लिखे ए, बी, सी और डी का गणित समझना जरूरी है।