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पिता घोड़ागाड़ी पर माल ढोते हैं, बेटी टीम इंडिया की कैप्टन बनी, देखिए प्रोफाइल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 18 Oct 2017 09:08 AM IST
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hockey player rani rampal
- फोटो : amarujala
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बहादुर बेटी को सलाम, पिता घोड़ागाड़ी पर माल ढोते हैं और बेटी ने टीम इंडिया की कैप्टन बनकर उनका सिर फक्र से ऊंचा कर दिया। जानिए कौन हैं ये होनहार...
भारतीय महिला हॉकी टीम की कैप्टन रानी रामपाल
बात हो रही है, भारतीय महिला हॉकी टीम की फास्ट फॉरवर्ड प्लेयर रानी रामपाल की, जिन्हें नए हेड कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में सीनियर महिला एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट खेलने के लिए भारत की 18 सदस्यीय टीम की कप्तानी सौंपी गई है। यह टूर्नामेंट काकामिगहारा सिटी, जापान में 28 अक्टूबर से खेला जाएगा। गोलरक्षक सविता टीम की उपकप्तान होंगी। 1 से 10 अप्रैल तक कनाडा में खेली गई वर्ल्ड लीग राउंड 2 में भी रानी टीम की कप्तान थीं।
hockey player rani rampal
- फोटो : amarujala
अपनी इस उपलब्धि से रानी रामपाल बेहद खुश हैं। वे कहती हैं कि मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी टीम जापान में महिला एशिया कप में बेहतरीन प्रदर्शन करेगी। हमें जहां भी खेल में सुधार की जरूरत थी हमने वे सुधार किए हैं। हमारी टीम एक इकाई के तौर पर बढ़िया खेल रही है। जापान में एशिया कप में बेहतरीन प्रदर्शन कर लंदन में होने वाले महिला एशिया कप के लिए क्वॉलिफाई करना हमारा टारगेट है।
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hockey player rani rampal
- फोटो : amarujala
हरियाणा में अंबाला के एक छोटे गांव की बेटी रानी रामपाल की जिंदगी बचपन से ही दुश्वारियों से गुजरी। पिता ठेला चलाते थे और आज जब बेटी एक मुकाम पर पहुंच गई है, दुनिया में नाम रोशन कर रही है, पिता आज भी घोड़ागाड़ी ही हांकते हैं। वहीं रानी को इस बात की जरा भी हिचक नहीं है कि उसके पिता आज भी मजदूरी करते हैं, बल्कि उसे अपने पिता पर गर्व है और इसलिए अपने नाम के साथ पिता का भी नाम लगा रखा है।
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rani rampal father
- फोटो : amarujala
रानी रामपाल को अर्जुन व भीम अवार्ड से नवाजा जा चुका है। रानी रामपाल खुद बताती हैं कि घर में इतने पैसे भी नहीं थे कि वे मेरे लिए हॉकी भी खरीद सकें, लेकिन मेरे सपनों में उड़ान थी और उन्हीं सपनों और इच्छाओं को देखते हुए पिता ने मुझे गांव की एकेडमी में डाल दिया। भाई कारपेंटर था तो पिता और भाई दोनों के साथ की वजह से मेरी प्रैक्टिस किसी तरह चलती रही। एकेडमी को द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता बलदेव सिंह चलाते थे।