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घुड़सवारी में मुकाम हासिल कर बेटी ने पीएम को दी सलामी
Tue, 09 Feb 2016 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
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Updated Tue, 09 Feb 2016 09:35 AM IST
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घुड़सवारी में मुकाम हासिल कर बेटी ने पीएम को दी सलामी
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'लड़कियां घुड़सवारी नहीं करती'...ग्रामीणों के उलाहनों ने जोश भरने का काम किया और फिर बेटी ने घुड़सवारी में मुकाम हासिल कर प्रधानमंत्री को सलामी दी। देखिए तस्वीरें। रिपोर्ट: सुभाष चंद्र,हिसार।
घुड़सवारी में मुकाम हासिल कर बेटी ने पीएम को दी सलामी
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लड़कियां घुड़सवारी नहीं करती। यह खेल तो लड़के ही खेल सकते हैं...तुम इसमें क्या करोगी। ये खेल तुम्हारे बस का नहीं है। इसे छोड़कर दूसरा खेल खेलो...। कुछ इसी तरह के उपेक्षा भरे शब्दों से किसी का भी हौसला टूट जाए, लेकिन ग्रामीणों के इन उलाहने भरे शब्दों ने उसके अंदर जोश भरने का काम किया। बस फिर क्या था घुड़सवारी में मुकाम बनाने की ठानी और कई पदक जीतकर प्रधानमंत्री को सलामी दी। बात है गांव ढाणी गारन की रहने वाली रितु।
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चार बहनों में सबसे छोटी रितु के पिता एक किसान है। पुरुषों का खेल कहे जाने वाले घुड़सवारी में रितु ने स्वर्ण पदक जीतकर दिखा दिया कि पुरुषों के वर्चस्व वाले खेलों में महिलाएं पीछे नहीं हैं। रितु ने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की घुड़सवारी प्रतियोगिता में तीन पदक जीते। रितु ने जनवरी में दिल्ली में हुई प्रतियोगिता में घुड़सवारी में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीता। इस तरह से रितु ने गांव की पहली महिला घुड़सवार खिलाड़ी बनकर नाम रोशन किया। गांव के लोग कभी उनके इस खेल को देखकर उसे ताना देते थे।
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लुवास में बीवीएसी (बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस) में तृतीय वर्ष की छात्रा रितु ने कुछ करने की तमन्ना लिए एनसीसी ज्वाइन की। यहां भी उसे उपेक्षा का सामना करना पड़ा। घुड़सवारी के लिए 12 लड़कियों का चयन किया गया, लेकिन रितु को नहीं चुना गया। किस्मत से इनमें से कुछ लड़कियों ने नाम वापस ले लिए, इससे रितु को घुड़सवारी का मौका मिला। बस वहीं से रितु की सफलता की कहानी शुरू हो गई। उसने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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रितु ढाणी गारन की एकमात्र घुड़सवार की खिलाड़ी है। साथ ही एकमात्र मेडिकल की छात्रा भी है। रितु ने बताया कि वह उसकी बड़ी बहन और जीजा ने उसका खेल और पढ़ाई में बहुत साथ दिया है। वे उसे खेल में अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित भी करते हैं।
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