Haryana : सफर 2022, रोजगार और भर्तियों को लेकर साल भर विपक्ष के निशाने पर रही सरकार, सबक ले 2023 की राह चुनेगी
राजनीति: सत्ता के लिए शहर के साथ गांवों में होना होगा मजबूत
निकाय चुनाव के नतीजे तो सुखद रहे, लेकिन पंचायती राज चुनाव ने गठबंधन सरकार को मंथन पर मजबूर किया है। जोड़-तोड़ से अधिकतर जिला परिषद और ब्लॉक समिति चेयरमैन भाजपा-जजपा के ही बनेंगे पर 2024 के लिए गठबंधन दलों को धरातल पर खुद को और मजबूत करना होगा। कांग्रेस ने आदमपुर उपचुनाव में कड़ी चुनौती दी। आप और इनेलो पंचायत चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही हैं।
शिक्षा: आगे तो बढ़े, लेकिन लक्ष्य से काफी पीछे
सात लाख बच्चों को टैबलेट देना सरकार की बड़ी उपलब्धि रही। हालांकि, सिम वितरण और गलत कंटेंट चलने की शिकायतें भी मिलीं। स्कूलों के मर्जर और शिक्षकों के अव्यवहारिक तबादलों के कारण स्कूल शिक्षा विभाग निशाने पर रहा। बच्चे और अभिभावक अभी तक आंदोलनरत हैं। स्कूलों में तालाबंदी जारी है। पक्के व कच्चे शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से कुछ राहत जरूर मिली। 2022 में भी जेबीटी शिक्षकों के तबादले नहीं हो पाए। अतिथि शिक्षक सेवा नियमों और गलत तबादलों को लेकर आंदोलनरत रहे। छात्राओं के लिए बड़ी राहत है कि साथी योजना के तहत शिक्षण संस्थानों में परिवहन सुविधा मुहैया कराई है। 25 लाख स्कूली बच्चों का साल में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण करना शुरू किया गया है। मॉडल संस्कृति स्कूल 138 से बढ़कर 500 नहीं हो पाए। 50 स्टेम लैब अभी तक नहीं बनीं। सरकारी और निजी स्कूलों का ट्विनिंग यानि एक-दूसरे के साथ जोड़ने का कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया। प्रारंभ संस्थान हर जिले में स्थापित नहीं हो पाए।
सार्वजनिक परिवहन: उड़ान नहीं भर पाए सपने
महाराजा अग्रसेन हवाई अड्डा उड़ान योजना के तहत ही रहेगा। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की घोषणा कागजी साबित हुई। करनाल और भिवानी हवाई पट्टियों के रनवे की लंबाई 5000 फीट नहीं हुई। रोडवेज बेड़े में 809 में से लगभग दो सौ नई बसें ही शामिल हो पाईं। हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कारपोरेशन में इन बसों को तैयार किया जा रहा है। ठेकेदारों के नखरों के कारण बसें समय पर तैयार नहीं हो रहीं। परिवहन मुख्यालय के कुछ बड़े अधिकारियों का डिफाल्टर ठेकेदार को भी संरक्षण है, इसलिए वह मनमाने तरीके से बसें बना रहे हैं। 20 लग्जरी और 150 हीट वेंटिलेटेड एसी बसें खरीदने की प्रक्रिया इस साल सिरे नहीं चढ़ पाई। एक हजार बनी बनी अन्य बसें खरीदने का प्रस्ताव भी विचाराधीन ही रहा। लंबे समय के बाद छह जिलों में ई-टिकटिंग परियोजना शुरू हो गई। मैक्सी कैब नीति प्रस्ताव तक ही सीमित रही।
पर्यावरण संरक्षण: छोटे-छोटे कदमों से मिलेगी बड़ी सफलता
जलवायु एवं सतत विकास कोष अभी सपना है। विश्वविद्यालयों में जल, वायु, पृथ्वी, जंगल, ऊर्जा और कचरे पर छह अंतर संकाय शोध केंद्र स्थापित नहीं हुए। दस हाईटेक नर्सरियां तैयार नहीं हो पाईं। कालका से कलेसर तक नेचर ट्रेल कागजों में ही है। भिवानी की डाडम व अन्य खान, यमुनानगर-नूंह क्षेत्र में अवैध, अवैज्ञानिक व बेतरतीब खनन के लिए ठेकेदारों को सौ करोड़ से अधिक का जुमार्ना लग चुका है, लेकिन कानून की आड़ लेकर वे राशि जमा नहीं करवा रहे।
इस साल की शुरुआत में ही डाडम में हादसा होने से मजदूरों को जान गंवानी पड़ी थी। ई-रवाना लागू होने के बावजूद खनन क्षेत्र में घोटाले रुके नहीं। पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 30 फीसद से अधिक की कमी आई है। प्रख्यात पर्यावरणविद दर्शन लाल जैन के नाम पर तीन और एक लाख रुपये के दो पुरस्कार शुरू किए गए हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने के लिए लाइफ परियोजना पर काम शुरू, मिस्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। पेड़ों की गणना और जियो टैगिंग का काम शुरू हुआ।