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केंद्र का नया मसौदा: किसान ने पराली जलाई तो 15 माह तक नहीं छूटेगा पीछा, जमीन के रिकॉर्ड में रहेगी 'रेड एंट्री'

Mon, 21 Sep 2026 09:30 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: विकास कुमार Updated Mon, 21 Sep 2026 09:30 PM IST
सार

हरियाणा में पिछले खरीफ सीजन में पराली जलाने के 662 मामले सामने आए थे। इनमें नियमों का उल्लंघन करने पर 231 एफआईआर दर्ज की गईं और 248 किसानों की रेड एंट्री की गई। जींद में सबसे अधिक 176 मामले सामने आए। यहां 98 किसानों पर एफआईआर और 105 किसानों की मेरी फसल-मेरा ब्योरा में रेड एंट्री की गई।

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Centre drafts proposal Red entry to be recorded in revenue records for stubble burning
पराली जलाने पर होगी कड़ी कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पराली जलाने वाले किसानों पर अब लंबे समय तक कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। केंद्र सरकार ने एक मसौदा तैयार किया है। इसके तहत पराली या फसल अवशेष जलाने वाले किसान की जमीन की रेड एंट्री 15 माह तक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी। इस अवधि में दोबारा पराली जलाने या पूर्व में लगाया गया जुर्माना नहीं भरने पर रेड एंट्री की अवधि 15 माह और बढ़ाई जा सकेगी।

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केंद्र ने मांगें 60 दिन के सुझाव
मसौदे पर केंद्र ने 60 दिन में सुझाव मांगे हैं। अंतिम रूप मिलने के बाद इसके प्रावधान एनसीआर समेत हरियाणा में भी लागू हो सकते हैं। रेड एंट्री दर्ज होने से संबंधित किसान को फसल बेचने के साथ ऋण और जमीन को बंधक रखने जैसी प्रक्रियाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसान 15 माह की अवधि में दोबारा फसल अवशेष नहीं जलाता और निर्धारित शर्तों का पालन करता है तो अवधि पूरी होने के बाद उसे रेड एंट्री की श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा।

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पिछले साल 662 जगह जली पराली
हरियाणा में पिछले खरीफ सीजन में पराली जलाने के 662 मामले सामने आए थे। इनमें नियमों का उल्लंघन करने पर 231 एफआईआर दर्ज की गईं और 248 किसानों की रेड एंट्री की गई। जींद में सबसे अधिक 176 मामले सामने आए। यहां 98 किसानों पर एफआईआर और 105 किसानों की मेरी फसल-मेरा ब्योरा में रेड एंट्री की गई। इस सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

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उल्लंघन वाले जिलों में अधिकारियों पर भी कार्रवाई
पराली प्रबंधन में लापरवाही पर अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई थी। पिछले वर्ष 287 नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए गए थे, जबकि अलग-अलग जिलों में 16 अधिकारी निलंबित किए गए थे। जींद में 79 नोडल अधिकारियों को नोटिस और 10 को निलंबित किया गया। कैथल में 75 अधिकारियों को नोटिस दिए गए। हिसार में 14 को नोटिस और छह को निलंबित किया गया। फतेहाबाद में 46, पलवल में 29, करनाल में 14, रोहतक में 14, सोनीपत में 13 और सिरसा में तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए गए थे।

दो खरीद सीजन तक एमएसपी पर रोक : निदेशक
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक अमित खत्री के अनुसार, राज्य में नियमों का उल्लंघन कर पराली जलाने वाले किसानों की दो खरीद सीजन तक एमएसपी पर फसल नहीं खरीदी जाती। ऐसे किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का लाभ भी नहीं दिया जाता।

खरीफ-2025 में यह थी स्थिति
 
जिला कुल मामले एफआईआर रेड एंट्री
अंबाला 08 नहीं  नहीं
भिवानी 08  नहीं  नहीं 
चरखी दादरी 01  नहीं  नहीं 
फरीदाबाद 04 नहीं नहीं
फतेहाबाद 88 37 37
गुरुग्राम नहीं नहीं नहीं
हिसार 70 24 24
झज्जर 14 01 01
जींद 176 98 105
कैथल 72 11 10
करनाल 23 13 12
कुरुक्षेत्र 11 03 03
महेंद्रगढ़ नहीं नहीं नहीं
मेवात 01 नहीं नहीं
पलवल 16 08 08
पंचकूला 01 नहीं नहीं
पानीपत 04 02 02
रेवाड़ी नहीं नहीं नहीं
रोहतक 53 08 20
सिरसा 37 13 13
सोनीपत 68 11 11
यमुना नगर 07 02 02
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