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एक IAS, 34 साल की नौकरी 71 ट्रांसफर और अब 'अनोखी' रिटायरमेंट, जानिए कौन?

Mon, 12 Mar 2018 08:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 12 Mar 2018 08:33 PM IST
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Haryana IAS Officer Pradeep Kasni Retirement Without Salary
आईएएस प्रदीप कासनी
देश में एक आईएएस अफसर ऐसा, जो 34 साल की नौकरी में 71ट्रांसफर झेल चुके हैं और अब 'अनोखी' रिटायरमेंट ले रहे हैं। जानिए कौन हैं...
Haryana IAS Officer Pradeep Kasni Retirement Without Salary
आईएएस प्रदीप कासनी
हम बात कर रहे हैं हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी, जो 34 वर्ष की प्रशासनिक सेवा देने के बाद बिना वेतन ही सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। 28 फरवरी 2018 को वे रिटायर हो गए। राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उनकी भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिलीविंग को मंजूरी दे दी। खास बात ये कि कासनी को सितंबर 2017के बाद से वेतन ही नहीं मिला है और बिना वेतन ही रिटायरमेंट ली।
Haryana IAS Officer Pradeep Kasni Retirement Without Salary
आईएएस प्रदीप कासनी
ऐसा इसलिए, क्योंकि वे लैंड यूज बोर्ड के ओएसडी पद से रिटायर हो रहे हैं और सरकार के रिकार्ड में उस पद का कोई वजूद ही नहीं है। उन्होंने इसके खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में अपील की है, जिस पर 8 मार्च को फैसला आएगा। प्रदेश सरकार ने उन्हें 23 अगस्त 2017 को हरियाणा लैंड यूज बोर्ड में नया पद सृजित कर ओएसडी लगाया था।
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Haryana IAS Officer Pradeep Kasni Retirement Without Salary
IAS officer Pradeep Kasni - फोटो : File Photo
लेकिन इस पद पर उन्हें सेलरी नहीं दी गई। जब उन्होंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि लैंड यूज बोर्ड कहीं अस्तित्व में ही नहीं है। आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई तो सरकार ने बताया कि इसे तो वर्ष 2008 में ही खत्म किया जा चुका है। इससे कासनी के पैरों तले जमीन खिसक गई। कासनी ने इस अन्याय के विरुद्ध कैट यानि केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण का दरवाजा खटखटाया हुआ है।

 
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Haryana IAS Officer Pradeep Kasni Retirement Without Salary
pradeep kasni
उनकी मांग है कि उनके तबादला आदेश रद्द किए जाएं। कैट में उनके मामले की सुनवाई चल रही है। उन्हें वेतन, गाड़ी व ऑफिस देने के आदेश कैट कुछ माह पहले कर चुका है, लेकिन सरकार के गले की फांस यह बन गई है कि उन्हें वेतन दें तो किसी पद के विपरीत। चूंकि, जहां वह तैनात हैं, वह किसी विभाग के तहत आता ही नहीं। इसलिए सरकार अभी तक वेतन नहीं दे पाई है। हालांकि, उन्हें दफ्तर तो नव सचिवालय में दे दिया गया था।
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