सरकार ने अपने एक फैसले से सभी को हिला कर रख दिया है। यह फैसला वीआईपी कल्चर के मुंह पर एक तमाचे की तरह है, आप खुद देख लिजिए।
दरअसल, हरियाणा मोटर यान अधिनियम 1988 में भी संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इसकी धारा-177 के तहत मरीज ले जा रही एंबुलेंस को रास्ता न दिए जाने पर जुर्माने का प्रावधान किया है। एंबुलेंस का रास्ता रोकने पर वाहन चालक पर 2 हजार रुपए जुर्माना होगा। ऐसा दूसरी बार हुआ तो 5 हजार रु. जुर्माना पड़ेगा।
वहीं, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के बिना वाहन चलाने के लिए पहली बार 500 रुपए, फिर एक हजार वसूला जाएगा। डीएल के बिना वाहन चलाने पर पहली बार एक हजार और दूसरी बार 2 हजार रु. जुर्माना लगेगा। लर्निंग लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन पर पहली बार एक हजार, दूसरी बार 2 हजार रुपए जुर्माना लगेगा।
तय क्षमता से 25% ज्यादा वजन पर 2 हजार रुपए जुर्माना लिया जाएगा। ओवरलोड उतारने का शुल्क भी देना होगा। प्रति टन अधिक भार पर एक हजार रु. की अतिरिक्त राशि देनी होगी। क्षमता से 25% से भी ज्यादा ओवर लोड होने पर जुर्माना राशि 5 हजार रु. होगी और उसे अतिरिक्त भार को उतारने के लिए भी शुल्क देना होगा। इसके अलावा उसे प्रति टन अधिक भार पर 2 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि भी देनी होगी।
यातायात नियमों का उल्लंघन पर वाहन चालकों को अब भारी जुर्माना चुकाना होगा। ओवरलोडिंग पर कम से कम और अधिकतम जुर्माने का निर्णय अब तक पुलिस पर था, लेकिन अब सरकार ने इसकी राशि तय कर दी है। मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। सरकार ने मोटर यान अधिनियम 1988 के तहत अपराधों के लिए जुर्माना शुल्क संशोधित कर दिया है।