एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाएगा और साथ ही एक नया सिस्टम। यह कारोबारियों के बड़ा तोहफा होगा और अफसरों के मुसीबत, जानिए इसके बारे में।
एक जुलाई के बाद रास्ते में कारोबारियों व उद्यमियों के गुड्स कंसाइनमेंट को बिना वजह यदि किसी भी टैक्स आफिसर या इंस्पेक्टर ने रोका या किसी प्रकार की नाजायज मांग की तो उन्हें कंसाइनमेंट की यह ‘नजरबंदी’ महंगी पड़ जाएगी। ऐसा संभव होगा लागू होने वाली जीएसटी के अंतर्गत ई-वे बिल सिस्टम से।
इसमें ऐसा प्रावधान किया गया है कि कारोबारी व उद्यमी के माल की उचित सप्लाई को अब कोई भी बिना वजह सड़क पर रोककर उन्हें नाजायज तंग नहीं कर पाएगा। केंद्रीय शुल्क (ऑडिट) आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय ने इस सिस्टम से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ सरकारों को अवगत करवा दिया है। विभाग के एक आला अफसर ने बताया कि इससे माल सप्लाई के दौरान रास्ते में बिना वजह का शोषण खत्म हो जाएगा।
अभी स्थिति यह है कि कारोबारी अपने माले की कंसाइनमेंट राज्य के भीतर या राज्य से बाहर भेजता है, तो कई बार केंद्रीय व राज्य सरकारों के अधीनस्थ सेल्स टेक्स, एक्साइज टैक्स इत्यादि विभाग के अफसर व निरीक्षक रोक लेते हैं। कई-कई घंटों माल से लदे ये वाहन राज व राष्ट्रीय मार्गों के किनारे सड़कों पर बिना वजह अफसर व निरीक्षक की नजरबंदी में रहते हैं।
इस शोषण से बचने के लिए कई तो अफसर व निरीक्षक को रिश्वत देकर बिना जांच के निकल जाते हैं और जो ऐसा नहीं करते उन्हे घंटों बिना वजह दस्तावेजी जांच में फंसकर परेशान होना पड़ता है। ई-वे बिल सिस्टम के बाद ऐसा नहीं होगा। अगर अफसर ने माल लदे वाहन को आधे घंटे से ज्यादा रोका तो उसे जवाब देना होगा।