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शहद इकट्ठा करने से बन सकते हैं अमीर, ये बिजनेस और 2 तरीके अपनाएं...खूब पैसा कमाएं
Wed, 30 Jan 2019 09:15 AM IST
खुशबू गोयल
सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़
सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 30 Jan 2019 09:15 AM IST
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महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तीकरण शहरी, कामकाजी महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। अब सुदूर कस्बों और गांवों की महिलाएं भी अपने अरमानों को उड़ान दे रही हैं। खासकर जब उन्हें कोई गौरव लडवाल जैसा खेवनहार मिल जाए। उत्तराखंड के जिला चंपावत के गौरव लडवाल ने महिला सशक्तीकरण का बीड़ा उठाया और राज्य सरकार द्वारा चाय पत्ती के काम को एक साल पहले बंद करने से इसमें लगी महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। अब 22 गांवों की ये 422 महिलाएं जंगल में जाकर नेचुरल तरीके से शहद बना रही हैं।
Darjeeling tea industry
कमाई को कर रहे हैं री-इन्वेस्ट
कुमाऊं आर्गेनिक ग्रुप से जुड़ी ये महिलाएं अपनी आय का आधा हिस्सा कंपनी में इन्वेस्ट करती हैं। इस पैसे से उनके नाम से मशीनरी या जरूरत का सामान खरीदा जाता है। गौरव बताते है कि अभी तक कुमाऊं आर्गेनिक ग्रुप में सारा पैसा उन्होंने ही लगाया हुआ था। लेकिन अब यह महिलाएं भी उनकी पार्टनर है। उत्तराखंड सरकार आर्गेनिक खेती केलिए सब्सिडी देती है, लेकिन फिलहाल उन्हें कुछ नहीं मिला है। अपने ही सीमित संसाधनों से वे ग्रुप को प्रमोट कर रहे हैं।
कुमाऊं आर्गेनिक ग्रुप से जुड़ी ये महिलाएं अपनी आय का आधा हिस्सा कंपनी में इन्वेस्ट करती हैं। इस पैसे से उनके नाम से मशीनरी या जरूरत का सामान खरीदा जाता है। गौरव बताते है कि अभी तक कुमाऊं आर्गेनिक ग्रुप में सारा पैसा उन्होंने ही लगाया हुआ था। लेकिन अब यह महिलाएं भी उनकी पार्टनर है। उत्तराखंड सरकार आर्गेनिक खेती केलिए सब्सिडी देती है, लेकिन फिलहाल उन्हें कुछ नहीं मिला है। अपने ही सीमित संसाधनों से वे ग्रुप को प्रमोट कर रहे हैं।
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महिला सशक्तिकरण
समय-समय पर दिलवाते हैं ट्रेनिंग
गौरव लडवाल के ग्रुप में 422 महिलाएं हैं, जो जंगल में जाकर नेचुरल तरीके से शहद तैयार करती हैं। ज्यादातर महिलाएं शादीशुदा और अकुशल हैं, इसलिए गौरव समय-समय पर उनके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाते हैं। शहद के अलावा उन्हें चाय पत्तियों के बारे में भी ट्रेनिंग र्दी जाती है। इससे उन्हें पता चलता है कि किस पत्ती से व्हाइट टी बनेगी और किस पत्ती से ब्लैक टी। उनकी बनाई व्हाइट टी की जबरदस्त डिमांड है। जबकि ब्लैक टी के लिए वे देश में मार्केट तैयार कर रहे हैं।
गौरव लडवाल के ग्रुप में 422 महिलाएं हैं, जो जंगल में जाकर नेचुरल तरीके से शहद तैयार करती हैं। ज्यादातर महिलाएं शादीशुदा और अकुशल हैं, इसलिए गौरव समय-समय पर उनके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाते हैं। शहद के अलावा उन्हें चाय पत्तियों के बारे में भी ट्रेनिंग र्दी जाती है। इससे उन्हें पता चलता है कि किस पत्ती से व्हाइट टी बनेगी और किस पत्ती से ब्लैक टी। उनकी बनाई व्हाइट टी की जबरदस्त डिमांड है। जबकि ब्लैक टी के लिए वे देश में मार्केट तैयार कर रहे हैं।
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महिला सशक्तिकरण
विदेशों में जा रही है चाय पत्ती
कुमाऊं की चाय पत्ती कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड में भेजी जा रही है। अब साउथ कोरिया, अमेरिका और आस्ट्रेलिया में भी सेंपल भेजे हैं। आर्डर मिलने पर वहां भी इसे भेजा जाएगा। इसके अलावा वे देशभर में लगने वाले आर्गेनिक मेलों में अपनी ब्रांडिंग करते हैं। 12 से 14 जनवरी तक चंडीगढ़ सेक्टर 10 की लेजर वैली में लगे भारतीय महिला उत्सव में भी वे अपने उत्पाद लेकर आए थे। गौरव का दावा है कि कुमाऊं की चाय दार्जिलिंग की चाय से भी अच्छी क्वालिटी की है।
कुमाऊं की चाय पत्ती कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड में भेजी जा रही है। अब साउथ कोरिया, अमेरिका और आस्ट्रेलिया में भी सेंपल भेजे हैं। आर्डर मिलने पर वहां भी इसे भेजा जाएगा। इसके अलावा वे देशभर में लगने वाले आर्गेनिक मेलों में अपनी ब्रांडिंग करते हैं। 12 से 14 जनवरी तक चंडीगढ़ सेक्टर 10 की लेजर वैली में लगे भारतीय महिला उत्सव में भी वे अपने उत्पाद लेकर आए थे। गौरव का दावा है कि कुमाऊं की चाय दार्जिलिंग की चाय से भी अच्छी क्वालिटी की है।