पद्मभूषण लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह की वीरता की मिसाल यूनिफार्म, पूर्वी थिएटर में दूसरे विश्व युद्ध के लिए कोहिमा का युद्ध की वो अद्भुत 458 फोटोज, ‘कलारी प्याटू’ मार्शल आर्ट, ‘खुकरी’ नाच और पंजाब के मार्शल आर्ट ‘गतके’ की वो झलक। भारतीय सेना की साहस, जुनून और जज्बे की इस झलक संग ‘तीसरे मिलिट्री लिटेचरर फेस्टिवल 2019’ का आगाज हुआ।
देश के वीर जवानों के हैरतअंगेज करतब, देखकर हर कोई दंग, तस्वीरें बयां करती शौर्य और पराक्रम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शुक्रवार को चंडीगढ़ लेक क्लब सेक्टर-1 में हुआ। जहां मिलिट्री की वीरता की कहानी उनके हथियारों से लेकर उनकी ओर से दी गई कुर्बानी के किस्से से बयां की गई। फेस्टिवल के पहले दिन स्कूली बच्चों में देश की मिलिट्री के साहस और वीरता की कहानी को सुनते हुए उत्साह देखते ही बनता था। सुबह 11 बजे से शाम छह बजे तक चले इस फेस्टिवल में एक और आर्ट एंड फोटोग्राफी एग्जीबिशन से लेकर आर्मी बैंड की धुन से ही सभी के मानों रूंगठे उठे कर दिए।
जब स्टेज पर एक के बाद एक जवानों ने पेश किए मार्शल आर्ट के अद्भुत स्टंट
मिलिट्री लिटेचर फेस्टिवल में भारतीय सेना के जवानों ने अपनी वीरता को कभी मार्शल आर्ट से लेकर गतका से बयां किया। फेस्टिवल के एक कोने में उन्होंने मार्शल आर्ट के अद्भुत स्टंट दिखाए। इसकी शुरूआत कर्नल मुहम्मद रकीब के नेतृत्व में 474 इंजीनियरिंग ब्रिगेड की यूनिट 270 द्वारा करवाए गए। इस मार्शल आर्ट ने दर्शकों की खूब तारीफ बटोरी।
इसके इंचार्ज नायब सूबेदार भुपिंदर सिंह थे। सबसे पहले सिपाही अशोक कुमार के नेतृत्व वाली 5 मद्रास रेजिमेंट के 10 जवानों की टीम द्वारा ‘कलारी प्याटू’ मार्शल आर्ट पेश किया गया। ‘कलारी प्याटू’ वह भारतीय मार्शल आर्ट है जिसकी शुरुआत केरल से हुई है। दूसरी तरफ नायब सूबेदार निमा शेरिंग शेरपा के नेतृत्व में 2/5 गोरखा रेजिमेंट फ्रंट फाइटर 69 इंडियन इनफैंटरी ब्रिगेड की 21 सदस्यीय टीम ने ‘खुकरी’ नाच के साथ समा बांधा।
खुकरी नाच मुख्य तौर पर गोरखों की नृत्य कला है। इसके बाद में सूबेदार दलविंदर सिंह और नायक जगजीत सिंह के नेतृत्व अधीन 22 पंजाब की 21 सदस्यीय टीम ने पंजाब के प्रमुख मार्शल आर्ट ‘गतके’ के जौहर दिखाए। अंत में 36 मराठा मीडियम रेजिमेंट की 40 जवानों की टीम ने ‘झंज पाठक’ नृत्य पेश करके महाराष्ट्र की इस नाच कला का प्रदर्शन किया। इस टीम का नेतृत्व सूबेदार हेमंत ए. दिओरे ने किया। इस टीम ने पहली बार चंडीगढ़ में प्रस्तुति दी।