पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2007 में अपना आखिरी सियासी भाषण दिया था, जानना चाहेंगे कहां पर और क्या बोले थे वे। यहां क्लिक करके पढ़ें उनकी स्पीच....
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीतिक करियर का अंतिम राजनीतिक भाषण पंजाब में दिया था। वर्ष 2007 में अमृतसर सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में वाजपेयी जी भाजपा के प्रत्याशी नवजोत सिंह सिद्धू के चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
पंजाब की मौजूदा कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जोकि उस समय भाजपा में थे, ने 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर अमृतसर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लेकिन एक मामले में फंसने के बाद सिद्धू को इस सीट से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके चलते 2007 में अमृतसर सीट पर फिर से चुनाव हुआ। वाजपेयी जी इस उपचुनाव में जनता से सिद्धू को वोट देने की अपील करने पहुंचे थे।
इस तरह फरवरी, 2007 में वाजपेयी जी ने अमृतसर में जो भाषण दिया, वह उनका आखिरी राजनीतिक भाषण रहा, क्योंकि इसके बाद वाजपेयी जी अस्वस्थता के चलते सक्रिय राजनीति से दूर होते चले गए। फरवरी, 2007 में अमृतसर में दिया गया वाजपेयी जी का चुनावी भाषण भी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से बिल्कुल अलग और विपक्षी नेताओं के प्रति भी किसी तरह अनादर या अपशब्दों के विपरीत उनकी सरलता, नम्र स्वभाव, शब्दों की सौम्यता भरा था।
वाजपेयी जी की भाषण देने की इस कला से लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते थे। अमृतसर में उनके चुनावी भाषण भी तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाने में अहम साबित हुए थे। वाजपेयी जी के उस समय के भाषण की कुछ पंक्तियां इस प्रकार थीं- मुझे यह सुनकर ताज्जुब हुआ कि कांग्रेस के नेताओं ने यहां आतंकवाद का हौवा खड़ा करने की कोशिश की है। आतंकवाद के बारे में चर्चा करना यह दर्शाता है कि वोट के लिए कहां तक गिरा जा सकता है। लेकिन हमें मिलकर पंजाब और देश को बनाना है।