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...जब 3 दिन मैदान-ए-जंग में डटे रहे अटल बिहारी वाजपेयी, सेना को दिया था एक 'अटल' आदेश

Fri, 17 Aug 2018 05:11 PM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 17 Aug 2018 05:11 PM IST
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Atal Bihari Vajpayee Connection to Kargil War 1999
अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी तीन दिन तक मैदान-ए-जंग में डटे रहे, गोलियां बारूद बरस रहा था, लेकिन वे डिगे नहीं और सेना का एक 'अटल' आदेश देकर सबको चकित कर दिया।
Atal Bihari Vajpayee Connection to Kargil War 1999
Atal Bihari Vajpayee
बात 1999 की है, जब कारगिल में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी इस युद्ध को हर हाल जीतने के लिए बेताब थे। युद्ध जैसे-जैसे आगे बढ़ने लगा, अटल जान चुके थे, ये युद्ध पहले हुए युद्ध सरीखे आसान नहीं हैं। इसलिए उन्होंने खुद मैदान-ए-जंग में जाकर अफसरों और जवानों का हौसला बढ़ाने का फैसला लिया। युद्ध के दौरान ही अटल कारगिल पहुंच गए और तीन दिन वहां रहे। वहां उन्होंने सेना के जवानों और अफसरों से युद्ध की स्थिति का जायजा लेते हुए वहीं रहकर उनकी हौसला आफजाई की। बाद में अटल जी को वापस दिल्ली भिजवाया गया।
Atal Bihari Vajpayee Connection to Kargil War 1999
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
फौज को दिए थे आर या पार का हुक्म
आर्मी को पुख्ता इनपुट मिल चुका था कि पाकिस्तानी फौज एलओसी क्रास कर इंडिया की खाली पड़ी चौकियों पर जम गई है और आगे बढ़ने की फिराक में हैं। भारतीय फौज इस बार पाकिस्तान से आरपार की लड़ाई चाहती थी। इसके लिए तुरंत पॉलिटिकल क्लीयरेंस चाहिए थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को गृह और रक्षा मंत्रालय की मार्फत सारी स्थिति से अवगत करवाया गया। अटल बिहारी के साथ तत्कालीन गृह व रक्षा मंत्री और आर्मी के आला अफसरों की बैठक हुई, जिसमें न केवल आमने-सामने की लड़ाई को तुरंत पालीटिकल क्लीयरेंस दिए जाने पर चर्चा हुई। बल्कि इस युद्ध की रणनीति पर भी विचार हुआ। बैठक में ही अटल बिहारी ने पाक की इस नापाक हरकत पर अपना आक्रामक रुख जाहिर कर दिया था। उसके बाद प्रधानमंत्री की ओर से युद्ध को तुरंत पालीटिकल क्लीयरेंस दिलवाई गई और सेना को फ्री हैंड कर दिया गया।
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Atal Bihari Vajpayee Connection to Kargil War 1999
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बर्फ पिघलते ही हमला, गिरने से पहले करनी थी ‘फतेह’
चूंकि युद्ध मैदानी नहीं था, फौज के सामने ऐसा दुश्मन था, जिसे देख पाना तो दूर, पहले ढूंढना था और फिर उसे ढेर करना था। इस युद्ध को जीतने में कितना समय लगेगा, कुछ मालूम नहीं था। लेकिन तत्कालीन पीएम अटल बिहारी, अन्य मंत्रियों और सेना के आला अफसरों ने तय किया कारगिल की चोटियों पर बर्फ पिघलते ही भारतीय फौज हमला करेगी और बर्फ पड़ने से पहल हर हाल में फतेह सुनिश्चित करेगी। मई में कारगिल युद्ध की शुरुआत कर दी गई और 26 जुलाई को ऑपरेशन विजय यानी कारगिल पर फतेह कर युद्ध का औपचारिक समापन किया गया।
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Atal Bihari Vajpayee Connection to Kargil War 1999
Atal Bihari Vajpayee
रिटायर्ड मेजर जनरल सी. प्रकाश ने बताया कि कारगिल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी का रुख पूरी तरह से आक्रामक था।  कारगिल में पाक फौज का एलओसी क्रास करने का इनपुट मिलते ही तत्कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेयी ने तुरंत पाक को खदेड़ने के आदेश दे दिए थे और ये काम चोटियों पर फिर से बर्फ पड़ने से पहले पूरा करना था। इस युद्ध में फौज को किसी प्रकार से दिक्कत न हो इसके लिए युद्ध में फौज को हर तरह सुविधा उपलब्ध करवाने के भी निर्देश थे।
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