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अटल बिहारी वाजपेयी ने हरियाणा के साथ किया था एक ऐसा 'अटल' वादा, जो रह गया अधूरा
अमित रूखाया, अमर उजाला, फतेहाबाद(हरियाणा)
Updated Fri, 17 Aug 2018 05:11 PM IST
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अटल बिहारी वाजपेयी
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हरियाणा प्रदेश के साथ एक ऐसा 'अटल' वादा किया था, जो अधूरा था और अब अधूरा ही रह गया। किस्सा जानकर हैरान रह जाएंगे।
अटल बिहारी वाजपेयी
20 अगस्त 1999 को अपने आखिरी फतेहाबाद दौरे में उन्होंने कहा था कि अगली बार जब वे फतेहाबाद आएंगे तो रेल में बैठकर आएंगे। लेकिन अफसोस, अब वो कभी फतेहाबाद नहीं आ सकेंगे और फतेहाबाद में रेल आने की संभावनाएं पहले ही धूमिल हो चुकी है। वाजपेयी के आखिरी फतेहाबाद दौरे की एक और महत्वपूर्ण याद ये भी है कि 1999 के लोकसभा चुनावों में वोट मांगने पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी के साथ तत्कालीन प्रदेश बीजेपी प्रभारी नरेंद्र मोदी भी थे, जो अब देश के प्रधानमंत्री हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी
तीन बार फतेहाबाद आ चुके हैं वाजपेयी, पहले दौरे में मुट्ठी भर कार्यकर्ता पहुंचे थे मिलने
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हरियाणा और फतेहाबाद से खास लगाव था। इसी के चलते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार फतेहाबाद आ चुके हैं। इसमें उनका आखिरी फतेहाबाद दौरा बतौर प्रधानमंत्री था। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी सबसे पहले 1976 में फतेहाबाद आए थे। उस समय सिरसा में एक जलसे को संबोधित करने के बाद वो फतेहाबाद में आरएसएस के नेता डॉ. नवनीत राय के निवास पर कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हरियाणा और फतेहाबाद से खास लगाव था। इसी के चलते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार फतेहाबाद आ चुके हैं। इसमें उनका आखिरी फतेहाबाद दौरा बतौर प्रधानमंत्री था। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी सबसे पहले 1976 में फतेहाबाद आए थे। उस समय सिरसा में एक जलसे को संबोधित करने के बाद वो फतेहाबाद में आरएसएस के नेता डॉ. नवनीत राय के निवास पर कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे।
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अटल बिहारी वाजपेयी
मंच पर कुर्सियों की बजाए बाकी नेताओं के साथ नीचे बैठे
1976 के फतेहाबाद दौरे के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दोबारा फतेहाबाद आने के लिए 15 बरस का समय लग गया। वाजपेयी इसके बाद 1991 में विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी के लिए वोट मांगने फतेहाबाद पहुंचे थे। फतेहाबाद से उस समय डा. आत्मप्रकाश मेहता ने चुनाव लड़ा था। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने मंच पर कुर्सियों की बजाए बाकी नेताओं के साथ नीचे बैठे थे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 20 अगस्त 1999 को लोकसभा चुनावों के दौरान चुनावी जनसभा करने पहुंचे थे। इसी जनसभा में उनके साथ नरेंद्र मोदी भी आए थे और वाजपेयी ने फतेहाबाद में रेल लाइन बिछवाने का वादा किया था।
1976 के फतेहाबाद दौरे के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दोबारा फतेहाबाद आने के लिए 15 बरस का समय लग गया। वाजपेयी इसके बाद 1991 में विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी के लिए वोट मांगने फतेहाबाद पहुंचे थे। फतेहाबाद से उस समय डा. आत्मप्रकाश मेहता ने चुनाव लड़ा था। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने मंच पर कुर्सियों की बजाए बाकी नेताओं के साथ नीचे बैठे थे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 20 अगस्त 1999 को लोकसभा चुनावों के दौरान चुनावी जनसभा करने पहुंचे थे। इसी जनसभा में उनके साथ नरेंद्र मोदी भी आए थे और वाजपेयी ने फतेहाबाद में रेल लाइन बिछवाने का वादा किया था।
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अटल बिहारी वाजपेयी
एक वोट से सरकार गिरने पर वाजपेयी का दर्द, बोले थे, वही एक वोट लेने आया हूं
20 अगस्त 1999 में फतेहाबाद में डा. सुशील इंदौरा के पक्ष में चुनावी जनसभा को संबोधित करने फतेहाबाद पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण में महज एक वोट से उनकी सरकार गिरने का दर्द साफ तौर पर छलका था। डा. सुशील इंदौरा को पुराना साथी बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने भाषण के दौरान इसका बाकायदा जिक्र भी किया था। लोगों को संबोधित करते हुए वाजपेयी ने कहा था कि महज एक वोट से उनकी सरकार गिर गई थी, वही एक वोट आपसे लेने आया हूं। उनकी इस बात पर मौजूद भीड़ ने जोरदार नारों से उनका साथ देने के जयघोष किए और अंत में डा. सुशील इंदौरा को वाजपेयी की रैली के चलते सिरसा लोकसभा सीट पर जीत मिली थी।
20 अगस्त 1999 में फतेहाबाद में डा. सुशील इंदौरा के पक्ष में चुनावी जनसभा को संबोधित करने फतेहाबाद पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण में महज एक वोट से उनकी सरकार गिरने का दर्द साफ तौर पर छलका था। डा. सुशील इंदौरा को पुराना साथी बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने भाषण के दौरान इसका बाकायदा जिक्र भी किया था। लोगों को संबोधित करते हुए वाजपेयी ने कहा था कि महज एक वोट से उनकी सरकार गिर गई थी, वही एक वोट आपसे लेने आया हूं। उनकी इस बात पर मौजूद भीड़ ने जोरदार नारों से उनका साथ देने के जयघोष किए और अंत में डा. सुशील इंदौरा को वाजपेयी की रैली के चलते सिरसा लोकसभा सीट पर जीत मिली थी।