ऐतिहासिक कालका-शिमला ट्रैक पर पहले भी तीन बड़े हादसे हो चुके हैं और 4 लोगों की मौत भी। लोगों की चीखों में बदल गया था सफर, कुछ ऐसा था मंजर।
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टॉय ट्रेन के इंजन में लगी आग
मंगलवार की दोपहर हेरिटेज कालका-शिमला रेल ट्रैक पर कुमारहट्टी के पास हिमालयन क्वीन एक्सप्रेस में आग लग गई। इंजन से धुआं उठता देखकर यात्रियों में अफरातफरी मच गई। वे चिल्लाने लगे, कुछ लोग चलती ट्रेन से कूदने लगे। चालक ने तुरंत ब्रेक लगा दी और सहयोगियों की मदद से अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने का प्रयास किया। निकटवर्ती स्टेशन धर्मपुर और अग्निशमन विभाग को भी सूचना दी। करीब 20 मिनट बाद आग पर काबू पाया गया।
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टॉय ट्रेन के इंजन में लगी आग
सभी यात्री सुरक्षित हैं, लेकिन इस हादसे ने रेलवे की चिंता जरूर बढ़ा दी है। सीनियर डीसीएम अंबाला हरि मोहन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि हिमालयन क्वीन 52455 के इंजन में बिजली की तारों में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई थी। ट्रेन के लोको पायलटों, गार्ड व टीटीई की मुस्तैदी से बड़ी दुर्घटना होने से टल गई। अब रेलवे उन कर्मचारियों को उपयुक्त पुरस्कार देंगे, जिनकी मुस्तैदी से इंजन में आग लगने के समय बड़ी घटना होने से बच गई।
हिमालयन क्वीन के साथ एक हादसा सितंबर 2015 में भी हुआ था। उस वक्त भी एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया था। कालका परवाणू के बीच हिमालयन क्वीन के इंजन डिब्बे कपलिंग खुल जाने के कारण अलग-अलग हो गए। गनीमत यह रही कि डिब्बे पटरी से नहीं उतरे। इस घटना के कारण उस समय भी ट्रेन में यात्रा कर रहे सैलानियों में हड़कंप मच गया था। उस दिन दो बार ट्रेन के इंजन ने धोखा दिया था।
साल 2015 में ही कालका-शिमला ट्रैक पर टॉय ट्रेन डिरेल हो गई थी। इस हादसे में दो विदेशी सैलानियों की जान चली गई थी। हादसा ट्रेन के 3 डिब्बे उतरने से हुआ था। पटरी से उतरने के बाद डिब्बे पलट गए थे। 37 सैलानियों और 2 टूरिस्ट गाइड के साथ चार्टर ट्रेन में टूर पर निकले थे। 15 मिनट ही हुए थे कि हाल्ट टकसान से कुछ ही दूरी पर दो डिब्बे रेल की पटरी से उतर गए और यह हादसा हो गया।