पंजाब और हरियाणा सीमा पर किसानों का विरोध प्रदर्शन 13वें दिन में प्रवेश कर गया है। किसान शंभू बॉर्डर को ही टेंट सिटी में तब्दील करने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, लोहे के पाइप मंगवाकर राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच बने फुटपाथ पर टेंट से झोपड़ी नुमा हट तैयार किए जा रहे हैं, जिससे लगता है कि किसान शंभू बॉर्डर पर ही पक्का मोर्चा लगा सकते हैं।
शंभू बॉर्डर पर रविवार माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। न तो किसान आगे बढ़े और न ही हरियाणा पुलिस की तरफ से कोई हरकत हुई। किसानों की ओर से लंगर की सेवा व मरीजों की देखभाल के लिए बनाए गए स्थायी क्लीनिक विधिवत तरीके से चल रहे हैं।
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Farmer Protest
- फोटो : PTI
रविवार को नजदीकी गांव वासियों सहित महिलाएं भी काफी संख्या में पहुंची। निहंग सिंह जहां ढडाई बनाने के लिए अपना घोटना चलाते रहे, वहीं महिलाओं व बच्चों के लिए भी लस्सी के साथ पेय पदार्थ का इंतजाम द्वारा रहा।
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कृषि संघ किसानों से शांत रहने और शांति के साथ एमएसपी कानून के लिए लड़ाई जारी रखने की अपील कर रहे हैं। किसान यूनियनों ने शंभू बॉर्डर पर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन को लेकर रविवार को सेमिनार आयोजित किया गया।
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इस दौरान यह चर्चा की गई कि वैश्विक संगठन किस तरह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में एमएसपी की अवधारणा को प्रभावित कर रहा है। भारतीय किसान यूनियन एकता सिधुपुर के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि कैसे डब्ल्यूटीओ की नीतियां भारतीय किसानों के लिए मजबूत फंदा बन रही हैं क्योंकि उनकी नजर भारत जैसे विशाल देश पर है जिसका बाजार व कृषि क्षेत्र बहुत बड़ा है।
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उन्होंने कहा कि एमएसपी की गारंटी के बिना किसानों का जीवित रहना संभव नहीं है। डल्लेवाल ने बताया कि डब्ल्यूटीओ ने हमेशा भारत जैसे विकासशील देशों पर एमएसपी व्यवस्था को रोकने के लिए दबाव डाला है। एमएसपी और सब्सिडी के बिना हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं हैं।