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Farmer Protest: किसानों के हाथ नेताओं की डोर...चुनाव से पहले आंदोलनरत अन्नदाताओं का रुख तय करेगा सियासी तस्वीर
Wed, 13 Mar 2024 01:01 PM IST
शाहरुख खान
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़।
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़।
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 13 Mar 2024 01:01 PM IST
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Farmer Protest
- फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव से पहले पंजाब के किसान सड़क पर हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर अड़े किसानों ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पक्का मौर्चा लगा दिया है। पिछले किसान आंदोलन में जो वादे किए गए थे, वे पूरे न होने के कारण किसान काफी नाराज हैं।
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Farmer Protest
- फोटो : PTI
यानी लोकसभा चुनाव में यह आंदोलन सभी पार्टियों की परीक्षा भी लेगा। किसानों के एक तबके में केंद्र सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा है। किसान अन्य दलों पर भी सवाल उठा रहे हैं। प्रदेश भाजपा इस मुद्दे पर पिछले किसान आंदोलन की तरह चुप है।
Farmer Protest
- फोटो : PTI
वहीं, आप, कांग्रेस और शिअद खुलकर समर्थन में हैं। सियासी दल भी जानते हैं कि संसद का रास्ता किसान आंदोलन से होकर ही जाएगा। ऐसे में पंजाब में लोकसभा चुनाव में किसान क्या भूमिका निभाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकीं हैं।
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Farmer Protest
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आम आदमी पार्टी, कांग्रेस व शिरोमणि अकाली दल (शिअद) आंदोलन के समर्थन में भी उतर आई हैं, जबकि भाजपा पहले की तरह ही आंदोलन पर खामोश है। यह आंदोलन का ही असर है कि चुनाव को लेकर भाजपा-शिअद का गठबंधन भी सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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केंद्र सरकार से किसानों की प्रमुख मांगें
Farmer Protest
- फोटो : PTI
-न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाया जाए। इसके लिए अध्यादेश लाया जाए।
-दिल्ली मोर्चा के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जिन मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया गया था, उन्हें तुरंत लागू किया जाए।
-पिछले किसान आंदोलन में जिन किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाए।
-60 साल से ऊपर के किसानों को 10 हजार रुपये पेंशन दी जाए।
-पिछले आंदोलन में जिन किसानों की मौत हुई थी, उनके परिवार को मुआवजा तथा एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
-सभी किसानों का सरकारी और गैर सरकारी कर्ज माफ किया जाए।
-कृषि व दुग्ध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाया जाए।
-स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।
-केंद्र सरकार से किसान कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
-लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को केंद्र सरकार न्याय दे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
-दिल्ली मोर्चा के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जिन मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया गया था, उन्हें तुरंत लागू किया जाए।
-पिछले किसान आंदोलन में जिन किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाए।
-60 साल से ऊपर के किसानों को 10 हजार रुपये पेंशन दी जाए।
-पिछले आंदोलन में जिन किसानों की मौत हुई थी, उनके परिवार को मुआवजा तथा एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
-सभी किसानों का सरकारी और गैर सरकारी कर्ज माफ किया जाए।
-कृषि व दुग्ध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाया जाए।
-स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।
-केंद्र सरकार से किसान कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
-लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को केंद्र सरकार न्याय दे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।