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खुलासा: शिक्षण संस्थानों में सबसे ज्यादा होती है छेड़छाड़, ऐसे में कैसे बेटी पढ़ाए-बेटी बचाएं?

Mon, 15 May 2017 09:26 AM IST
अमित रूखाया/अमर उजाला, फतेहाबाद(हरियाणा)
अमित रूखाया/अमर उजाला, फतेहाबाद(हरियाणा) Updated Mon, 15 May 2017 09:26 AM IST
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Education institutions have the highest incidents of molestation
- फोटो : Demo Pic
जब स्कूल-कालेजों में ही बेटियां सुरक्षित नहीं हैं तो कैसे बेटी पढ़ाए और बेटी बचाएं? ये खुलासा सच में हैरान कर देने वाला है, देखिए..
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Education institutions have the highest incidents of molestation
molestation
स्कूल-कालेजों में ही बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। शिक्षण संस्थानों में छुट्टी के समय सबसे ज्यादा छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। इसके बाद बस स्टैंड और बाजार भी छेड़छाड़ की घटनाओं का सबसे बड़ा अड्डा बने हुए हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा हरियाणा के फतेहाबाद में पुलिस विभाग की ओर से कराए गए ऑनलाइन सर्वे में हुआ है।
Education institutions have the highest incidents of molestation
- फोटो : डेमो फोटो
इस सर्वे में 41 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और इस सर्वे के परिणाम आंखें खोल देने वाले हैं। प्रदेश के एडीजीपी ओपी सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उनके अनुसार, प्रदेश में कुल 118 जगहों को चयनित किया गया है, जहां छेड़छाड़ की सबसे अधिक संभावनाएं हैं। पुलिस पहले इन जगहों पर कार्रवाई की तैयारी में है।
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स्कूल कॉलेज की छुट्टी के बाद सबसे ज्यादा डर
ऑनलाइन सर्वे में पुलिस विभाग की ओर से पूछा गया था कि लड़कियों को प्रदेश में सबसे ज्यादा छेड़छाड़ कहां होती है, इस सवाल के जवाब भी चौंकाने वाले हैं। सर्वे में खुलासा हुआ है कि तकरीबन 40 फीसदी छेड़छाड़ की घटनाएं लड़कियों के स्कूल-कॉलेज से लौटते समय होती हैं। 24 फ ीसदी घटनाएं सुबह स्कूल-कॉलेज जाते समय होती हैं। इसके अलावा 23.9 फीसदी लोगों के अनुसार, शाम के समय बाजार जाते समय भी छेड़छाड़ होती है।
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सार्वजनिक वाहन भी सुरक्षित नहीं
स्कूल-कॉलेज से लौटते समय तो लड़कियां असुरक्षित महसूस करती ही हैं, स्कूल-कालेज के अंदर भी स्थिति बेहतर नहीं है। सर्वे के मुताबिक, 32 फीसदी युवतियां स्कूल कालेज के अंदर छेड़छाड़ की घटनाओं से डर जाती हैं, जबकि 22 फीसदी को शहरों के बाजारों में छेड़छाड़ अधिक दिखती है। प्रदेश के पार्क और सार्वजनिक वाहन (बस, ऑटो, रिक्शा, ट्रेन) आदि में भी युवतियां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करती। सर्वे के आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो साढ़े 20 फीसदी लड़कियों को पार्क में जाने और 21 फीसदी युवतियों को सार्वजनिक वाहन में चढ़ने से डर लगता है।
 
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