देखिए, क्या हुआ जब एक-एक महिला में दिखी 'द्रोपदी'?
टैगोर थियेटर के मंच पर जब एक-एक महिला में 'द्रोपदी' का रूप दिखा तो हर कोई देखता रह गया। देखिए तस्वीरें।
देखिए, क्या हुआ जब एक-एक महिला में दिखी 'द्रोपदी'?
हम बात कर रहे हैं नई दिल्ली के जाने माने लेखक और निर्देशक अतुल सत्य कौशिक के नाटक 'द्रोपदी' की। इस को दिल्ली सरकार द्वारा वर्ष 2013 के सर्वश्रेष्ठ नाटकों में से एक चुना गया।
देखिए, क्या हुआ जब एक-एक महिला में दिखी 'द्रोपदी'?
लेखक और निर्देशक अतुल सत्य कौशिक किसी भी विषय को अपने अंदाज से एक अनोखा रूप देने की खूबी रखते हैं। चाहे नाटक ‘चक्रव्यूह’ हो या फिर ‘कपल ट्रबल’ या फिर ‘द्रोपदी’। समाज की समस्याओं को मनोरंजक रूप में पिरोना और सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष करना उनको खूब आता है।
देखिए, क्या हुआ जब एक-एक महिला में दिखी 'द्रोपदी'?
चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में अलंकार थिएटर और द फिल्स एंड थिएटर सोसायटी (एफटीएस) द्वारा आयोजित नाट्य उत्सव में अतुल सत्य कौशिक के नाटकों ने थिएटर में दर्शकों को खींच लिया।
देखिए, क्या हुआ जब एक-एक महिला में दिखी 'द्रोपदी'?
इस नाटक की कहानी हरियाणा के एक बड़े परिवार की है। इस परिवार के सभी पुरुष एक बारात के साथ बाहर गए हैं। ऐसे में घर कि महिलाएं उनकी अनुपस्थिति में द्रोपदी के जीवन पर आधारित एक नाटक करने का निर्णय करती हैं। वह नाचते-गाते हुए द्रोपदी के जीवन के अलग-अलग अध्याय का मंचन करती हैं।