आपको लगता है कि सड़क किनारे मिलने वाला गन्ने का जूस आपके प्यास को बुझा देगा और शरीर को फायदा पहुंचाएगा, तो यह आपकी गलतफहमी है। सच्चाई देखिए...
जी हां, हकीकत यह है कि गन्ने का रस और बर्फ दोनों के प्रभाव अलग है। यदि आप जरा-सी सावधानी बरतेंगे तो बीमारी से बच सकते हैं। गन्ने का रस पीने से पहले एक बार देखिए कि वह बनता कैसे है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई बार गन्ने की सफाई नहीं की जाती।
गन्ने की सफाई न होने की वजह से उस पर काली फफूंद लग जाती है। इसके अलावा हो सकता है कि जिस गन्ने का जूस आप पी रहे हों, उस पर खेतों की मिट्टी न हटाई गई हो। या नींबू धब्बेदार हो या फिर उसके बीज भी नहीं निकाले गए हो। इसके आलावा...
क्या आपने कभी यह चेक किया कि जिन हाथों से ऐसा किया जा रहा है वह साफ हैं या नहीं। उन्हीं हाथों से गन्ना पकड़ा जाता है, जनरेटर चलाया जाता है मशीन को घुमाया जाता है। हाथ कभी धोए नहीं जाते। बस यहीं से बीमारी के सारे लक्षण शुरू हो जाते हैं।
ये बीमारियां होती हैं फफूंद लगे गन्ने का रस पीने से
गन्ने पर जो फफूंद होती है उससे हेपेटाइटिस ए, डायरिया और पेट की बीमारियां होती हैं। इसी प्रकार गन्ने की मिट्टी से भी पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। बॉटनी एक्सपर्ट डॉ. अवनीश पाण्डेय के अनुसार गन्ने में अगर लालिमा है तो इसके रस मत पीजिए।