21वें कॉमलवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली शूटर मनु भाकर ने ऐसी जिंदादिली दिखाई, देखकर सभी ने तालियां बजाकर तारीफ की।
हरियाणा के खिलाड़ियों का अपनी मिट्टी से गहरा जुड़ाव है। सफलता उनके सिर चढ़कर नहीं बोलती बल्कि और विनम्र बनाती है। सम्मान समारोह में अपनी कुर्सी पिता के लिए छोड़ जमीन पर बैठकर यह मिसाल पेश की कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता शूटर मनु भाकर ने।
फौगाट खाफ की ओर मंगलवार को हरियाणा के पदक विजेता खिलाड़ियों के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया। इसमें मनु भाकर अपनी मां सुमेधा और पिता रामकिशन के साथ पहुंची थीं। आयोजकों ने मनु और उनके माता-पिता का फूल-मालाओं से स्वागत कर कुर्सियों पर बैठाया।
इसके बाद कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी आए तो लोग उनके सम्मान में खड़े हो गए। जब सभी लोग कुर्सी पर बैठे तो मनु को तो कुर्सी मिल गई, लेकिन उनके माता-पिता की कुर्सी पर कोई और बैठ गया। यह देखते हुए मनु ने अपनी कुर्सी पिता के लिए छोड़ दी और मां के पास नीचे जमीन पर आकर बैठ गईं।
जगह कम पड़ने के कारण मंच पर ज्यादा कुर्सी रखने की जगह नहीं थी। किसी ने हमारा अपमान नहीं किया। न ही किसी ने कुर्सी छीनी थी। मैं अपनी मर्जी से मां के पास जमीन पर बैठी थी। आयोजकों ने हमारा सम्मान किया इसके लिए मैं उनकी आभारी हूं।
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