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पीपीई किट और मास्क पहन चेहरे पर हो गए गहरे जख्म, फिर भी हिम्मत नहीं हुई कम, जारी है जंग

Tue, 22 Sep 2020 10:35 AM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 22 Sep 2020 10:35 AM IST
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Corona Warriors Story May Encourage You to Fight With Corona Pandemic
कोरोना योद्धाओं को सलाम - फोटो : अमर उजाला
वो कोरोना है तो हम भी इंसान हैं। आज साथ ना होकर भी एक साथ हैं। हम सबके अंदर होता है एक योद्धा, खाली उस योद्धा को जगाना है। इस युद्ध में हर किसी को कोरोना योद्धा बनकर दिखाना है...  कोरोना से इस जंग में लिखी गई कविता की यह चंद लाइनें अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे पीजीआई, जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 के उन हजारों नर्सिंग ऑफिसर के जज्बे को बयां करती हैं जो अपने घर परिवार से दूर रहकर महीनों से कोरोना के मरीजों की सेवा करने में जुटे हुए हैं।


इतना ही नहीं कोरोना से इस जंग में पीपीई किट और मास्क पहनने के कारण इनके चेहरे पर गहरे जख्म हो गए हैं, लेकिन इनकी हिम्मत कम नहीं हुई है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बरते जा रहे एहतियात से उन्हें ड्यूटी के दौरान यह जख्म मिल रहे हैं। इसके बावजूद उनकी हिम्मत कम नहीं हुआ है। वे अपने कर्तव्य से हटने की बजाय दोगुने धैर्य और हिम्मत के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

कोविड-वार्ड में ड्यूटी के दौरान बचाव के लिए पहने जाने वाले पीपीई किट व एन95 मास्क से नर्सिंग ऑफिसर के चेहरे पर गहरे जख्म बन जा रहे हैं। लगातार छह से 7 घंटे तक किट पहनने से उनके नाक और गालों पर फोड़े हो रहे हैं। इतना ही नहीं कइयों को तो नाक से खून बहने की भी समस्या झेलनी पड़ रही है। बावजूद इसके उन्होंने अपनी ड्यूटी बंद नहीं की, बल्कि अस्पताल प्रशासन से कहकर उसे बदलवाया।   
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गगनप्रीत कौर - फोटो : अमर उजाला
नाक से ब्लीडिंग और चेहरे पर छाले...
पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर गगनदीप कौर कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल में सुपरवाइजर का काम देख रही हैं। रात 2 से सुबह 9 बजे तक की ड्यूटी के दौरान उन्हें अस्पताल में बनाए गए अलग-अलग 9 कोविड वार्ड की मानिटरिंग कर उसकी रिपोर्ट बनानी होती थी। गगन ने बताया कि ड्यूटी के दौरान किट पहनने पर उन्हें दूसरे दिन नाक से भयंकर ब्लीडिंग होने लगी।

उन्होंने खुद को संभाला और ब्लीडिंग बंद होने के बाद फिर ड्यूटी शुरू कर दी। गगन ने बताया कि किट और एन95 मास्क पहनने के कारण भयंकर गर्मी होती है। नाक से ब्लीडिंग और चेहरे पर छाले पड़ना सामान्य बात हो जाती है। लेकिन उस दौरान भी गगन ने हिम्मत नहीं हारी। उनका कहना है कि उनके चेहरे को देखकर उनका 9 साल का बेटा रोने लगता था।

कहता था कि मम्मी यह तुम्हें क्या हो गया है। उस समय गगन अपने बेटे को समझाती थीं कि कोरोना से मुकाबला कर रही हूं उस दौरान मुझे हल्की सी चोट लग गई है जो जल्दी ही ठीक हो जाएगी। 
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किशोर सैनी - फोटो : अमर उजाला
नाक पर चोट के कारण गहरे जख्म
पीजीआई के ही नर्सिंग ऑफिसर किशोर सैनी लगातार कई महीनों से अपने परिवार से दूर रहते हुए कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं। किशोर को भी ड्यूटी के दौरान पीपीई किट से काफी जख्म मिल चुके हैं। किशोर की नाक पर चोट के कारण गहरे जख्म हो गए थे । जिसे ठीक करने के लिए उन्हें कई दिनों तक दवा और मलहम का सहारा लेना पड़ा।

किशोर ने बताया कि नाक पर बने जख्म के कारण उन्हें काफी दर्द होता था। ड्यूटी के दौरान इस दर्द को भूलकर कोरोना के मरीजों की देखभाल की। किशोर का कहना है कि उनकी तरह पीजीआई के दर्जनों नर्सिंग ऑफिसर ड्यूटी के दौरान ऐसे जख्म ले चुके हैं, लेकिन किसी के जज्बे में कोई कमी नहीं आई है। वे भी अभी उसी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कोविड-वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।
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नर्सिंग ऑफिसर कुमोद - फोटो : अमर उजाला
खून बहा तो पट्टी बांधी और कुमोद लग गए काम पर  
जीएमसीएच- 32 के नर्सिंग ऑफिसर कुमोद के साथ भी ऐसा ही हुआ है। कोविड-वार्ड में ड्यूटी के दौरान कुमोद के भी नाक और चेहरे पर जख्म हो गए थे। नाक पर बना जख्म इतना गहरा था कि उसके लिए उन्हें प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाना पड़ा। नाक के जख्म से  खून बहने पर कुमोद ने पट्टी बांधकर फिर से ड्यूटी शुरू कर दी थी।

ड्यूटी के साथ ही कुमोद ने रक्तदान और कोरोना से बचाव के लिए खुद से मास्क बनाने का काम भी जारी रखा। कुमोद ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सिलाई मशीन पर खुद लोगों के लिए मास्क की सिलाई की। कुमोद का कहना है कि इस संकट की घड़ी में अपने छोटे-मोटे जख्मों को देखने की बजाय महामारी से मरने वाले लोगों के बारे में सोचने और कुछ करने की जरूरत है।  
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दविंदर कौर - फोटो : अमर उजाला
नर्सिंग ऑफिसर दविंदर कौर बोलीं- इस जंग में जीत हमारी ही होगी  
जीएमएसएच- 16 की नर्सिंग ऑफिसर दविंदर कौर का चेहरा पीपीई किट के कारण पूरी तरह खराब हो चुका है। किट से हुई एलर्जी के कारण उनके चेहरे पर गहरे दाग बन चुके हैं । दविंदर का कहना है कि घर परिवार से दूर रहकर हम कोरोना को हराने में जुटे हुए हैं। ऐसे में चेहरे की खूबसूरती के बारे में सोच कर वक्त जाया करने की बजाय मरीजों की देखभाल कर इस बीमारी को खत्म करने पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है। दविंदर का कहना है कि चेहरे के जख्म को दवाइयों से ठीक किया जा सकता है, लेकिन कोरोना के कारण होने वाली मौतों को न रोका गया तो स्थिति भयानक हो सकती है।
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