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ये हैं राजनीति के 'गुरु', जिनकी उड़ाई आंधी में उलझकर बुरी तरह बिखर गया 'झाड़ू'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 12 Mar 2017 09:10 AM IST
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नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
पहले बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आए, फिर ऐसी आंधी उड़ाई कि झाड़ू तिनका तिनका होकर बिखर गया। अब इन्हें राजनीति का 'गुरु' कहा जाए तो गलत नहीं होगा।
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राहुल गांधी और नवजोत सिद्धू
- फोटो : File Photo
हम बात कर रहे हैं, बीजेपी छोड़कर कांग्रेस ज्वॉइन करके राजनीति में खलबली मचाने वाले नवजोत सिद्धू की। पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से इनका कड़ा मुकाबला था, जिसमें शय और मात का खेल ऐसा चला कि आम आदमी पार्टी और केजरीवाल देखते रह गए। पंजाब में कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बना रही है। आइए बताते हैं कि नवजोत सिद्धू की जिंदगी और सियासी सफर के बारे में सब कुछ।
सिद्धू
पिता भी क्रिकेटर थेः नवजोत सिंह सिद्धू का जन्म 20 अक्टूबर 1963 को पंजाब राज्य के पटियाला जिले में हुआ था। उनके पिता सरदार भगवंत सिंह सिद्धू भी एक क्रिकेटर थे और वो अपने बेटे नवजोत को एक उच्च श्रेणी के क्रिकेटर के रूप में देखना चाहते थे। सिद्धू ने पटियाला के यदिवेंद्र स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा और चंडीगढ़ के मोहिन्द्रा कॉलेज से स्नातक उत्तीर्ण की और वो पंजाव यूनिवर्सिटी से कानून विषय में स्नातक है।
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अमृतसर के कंपनी बाग में नवजोत सिद्धू
न सिगरेट पीते हैं, न शराबः नवजोत सिंह की पत्नी का नाम नवजोत कौर है, जो पेशे से एक डॉक्टर हैं और सिद्धू की तरह राजनेता भी। सिद्धू की एक बेटी राबिया और एक पुत्र करण है। सिद्धू बहुत खुशमिजाज और सात्विक व्यक्ति हैं, जो न सिगरेट पीते हैं और न ही शराब पीते हैं। अपनी शेरों-शायरी से भी वे लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लोग उन्हें सिद्धू सिक्सर, सिद्धू पाजी और शेरा पाजी कहकर भी पुकारते हैं।
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ऐसे किया नवजोत को प्रपोजः सिद्धू बताते हैं कि उन्हें नवजोत कौर से पहली नजर में ही प्यार हो गया था, मगर उन्हें मनाने में उन्हें काफी वक्त लगा। वो जहां से रोज निकलती थीं वहां एक चिकेन की दुकान थी। वो रोज वहां चिकेन खाते थे और उनका इंतजार करते रहते थे। वो जैसे ही वहां से अपनी एक सहेली के साथ निकलती थीं वो उनके पीछे-पीछे चलने लगते थे। पीछे से सिद्धू उन्हें कहते थे हां कर दो, हां कर दो मगर वो ना, ना कहते हुए आगे निकल जाती थीं। ये सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा, आखिरकार नवजोत कौर ने सिद्धू को हां कर दी।