क्या किसी राजनेता का बेटा या रिश्तेदार होना इस बात का लाइसेंस होता कि वह कुछ भी कर सकता है? पुलिस इन सवालों से बच नहीं सकती, देखिए
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subhash brala son charged for molestation
हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकाश बराला द्वारा हरियाणा कैडर के एक सीनियर आईएएस की बेटी का रास्ता रोकने, छेड़छाड़ करने के बाद शहर में गुस्से का माहौल है। लोगों ने आरोप लगाया कि राजनैतिक परिवार के बच्चों को अपने हद में रहना चाहिए। इसके अलावा सभी को महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए।
सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले केंद्र शाषित प्रदेश चंडीगढ़ में सरेआम एक युवती के साथ ऐसी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल वे पैरेंट्स भी उठा रहे हैं, जिनकी बेटियां देर रात तक नौकरी के लिए बाहर रहती हैं। मामला तूल पकड़ चुका है। धरने प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। उधर, इस घटना के बाद कई सवाल भी उठने लगे हैं।
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थाने से ही जमानत देने पर सवाल
पहले तो यह केस जमानती धाराओं में दर्ज हुआ और उसकेबाद थाने से ही आरोपियों को जमानत दे दी गई। चंडीगढ़ पुलिस की इस कार गुजारी पर हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब चंडीगढ़ पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों को गिरफ्तार करती है, तो उन आरोपियों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश करती है। नेताओं के लड़के फंसे तो उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गई। क्यों?
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चंडीगढ़ पुलिस पर हर तरफ से आरोप लग रहे हैं कि केस दर्ज करने में कमजोर धाराएं लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा किरकिरी किडनैपिंग के प्रयास की धारा (365, 511) न लगाए जाने के चलते हो रही है। यदि इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होता तो थाने में जमानत नहीं दी जा सकती थी। हल्की धारा लगाए जाने से आरोपियों को थाने से ही जमानत मिल गई। ऐसा क्यों?