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बराला कांड: पुलिस को देने होंगे इन सुलगते सवालों के जवाब

Tue, 08 Aug 2017 09:22 AM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 08 Aug 2017 09:22 AM IST
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Chandigarh Police will have to answer these questions
Chandigarh stalking case
क्या किसी राजनेता का बेटा या रिश्तेदार होना इस बात का लाइसेंस होता कि वह कुछ भी कर सकता है? पुलिस इन सवालों से बच नहीं सकती, देखिए
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subhash brala son charged for molestation
हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकाश बराला द्वारा हरियाणा कैडर के एक सीनियर आईएएस की बेटी का रास्ता रोकने, छेड़छाड़ करने के बाद शहर में गुस्से का माहौल है। लोगों ने आरोप लगाया कि राजनैतिक परिवार के बच्चों को अपने हद में रहना चाहिए। इसके अलावा सभी को महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए। 
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Chandigarh news
सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले केंद्र शाषित प्रदेश चंडीगढ़ में सरेआम एक युवती के साथ ऐसी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल वे पैरेंट्स भी उठा रहे हैं, जिनकी बेटियां देर रात तक नौकरी के लिए बाहर रहती हैं। मामला तूल पकड़ चुका है। धरने प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। उधर, इस घटना के बाद कई सवाल भी उठने लगे हैं।
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subhash brala son charged for molestation
थाने से ही जमानत देने पर सवाल
पहले तो यह केस जमानती धाराओं में दर्ज हुआ और उसकेबाद थाने से ही आरोपियों को जमानत दे दी गई। चंडीगढ़ पुलिस की इस कार गुजारी पर हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब चंडीगढ़ पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों को गिरफ्तार करती है, तो उन आरोपियों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश करती है। नेताओं के लड़के फंसे तो उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गई। क्यों?
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subhash brala son charged for molestation
चंडीगढ़ पुलिस पर हर तरफ से आरोप लग रहे हैं कि केस दर्ज करने में कमजोर धाराएं लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा किरकिरी किडनैपिंग के प्रयास की धारा (365, 511) न लगाए जाने के चलते हो रही है। यदि इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होता तो थाने में जमानत नहीं दी जा सकती थी। हल्की धारा लगाए जाने से आरोपियों को थाने से ही जमानत मिल गई। ऐसा क्यों?
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