सेक्टर-115 में इमारत गिरते ही आसपास अफरा तफरी मच गई। आसपास के दफ्तरवालों को लगा कि मानों भूकंप आ गया। तीन मंजिला इमारत पल भर में जमींदोज हो गई। हादसा होते ही खरड़ के बाशिंदों ने फरिश्ते का रोल निभाया। बिना प्रशासन की टीम इंतजार किए लोग खुद ही मलबा हटाने में जुट गए। क्या युवा, क्या बुजुर्ग, या बच्चे..सबने अपनी जान की बाजी लगा दी।
मलबा निकालकर इधर उधर फेंकने लगे। यह लोगों की मेहनत ही थी कि एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने से पहले ही दो लोगों को सकुशल निकालकर अस्पताल पहुंचा दिया गया था। जबकि हरजीत सिंह को रात 10 बजे एनडीआरएफ की टीम ने निकाला। अफसोस जेसीबी चालक हरबिंदर को नहीं बचाया जा सका। लोगों को उसकी मौत पर बहुत दुख हुआ।
जानकारी के मुताबिक जिस जगह रियल स्टेट कारोबारी का ऑफिस चल रहा था। कुछ समय बाद यह वहां से शिफ्ट होने वाला था। क्योंकि यह हिस्सा भी होटल में आने वाला था। इसको लेकर सारी तैयारियां चल रही थीं। खरड़ में हुए हादसे के बाद 12 के करीब जेसीबी और एंबुलेंस बचाव कार्य में जुट गई थी। 108 एंबुलेंस जिगित्सा हेल्थकेयर के प्रोजेक्ट हेड सायकत मुखर्जी ने कहा कि दुर्घटना से प्रभावित परिवारों और लोगों के प्रति मेरी सहानुभूति है। उम्मीद है कि कम से कम जानी व माली नुकसान होगा 108 एंबुलेंस सेवा ने लोगों की जान बचाने में मदद की।
मदद को आगे आई सामाजिक संस्थाएं
शनिवार को जो अंबिका ग्रुप की बिल्डिंग गिरी है, उसके मालिक प्रवीन कुमार धार्मिक प्रवृति के हैं। इस एरिया में बिल्डर प्रवीन कुमार द्वारा अनेक धार्मिक कार्यक्रम करवाए जाते हैं। इसी कारण हादसे की सूचना मिलते ही शहर की अनेक सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं मदद के लिए मौके पर पहुंच गई और मलबे को हटाने में मदद की।
गिलको ग्रुप के तेजवीर सिंह गिल अपनी टेक्निकल टीम और जेसीबी मशीन के साथ पहुंचे। विधायक कंवर संधू, कांग्रेस के पूर्व मंत्री जगमोहन सिंह कंग भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम हिमांशु जैन ने कहा कि अगर एनडीआरएफ टीम को मलबे में फंसे लोगों को निकालने में सफलता न मिलती तो सेना की मदद भी ली जाती।