देखिए, आतंकी हमले में शहीद हुए 7 वीर जवानों की वीरगाथा
पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमले में देश ने अपने 7 वीर जवानों को खोया। पढ़िए इन जवानों की वीरगाथा और सेल्यूट कीजिए उनके बलिदान को।
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लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार एनएसजी के बम निरोधक दस्ते के सदस्य थे। पठानकोट एयरबेस में एनएसजी की टीम को लीड कर रहे थे। हमले वाली जगह पर रविवार को एक ग्रेनेड डिफ्यूज करते समय विस्फोट में शहीद हो गए। वे सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप से एनएसजी में आए थे। निरंजन की पत्नी डॉ. केजी राधिका और उनकी दो साल की बेटी विस्मय है। निरंजन कुमार का जन्म बंगलूरू में हुआ था। उनके दो भाई और एक बहन है। माता का निधन बचपन में हो गया था। पिता ईके शिवरंजन बीईएमएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।
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पठानकोट एयरबेस में घुसे आतंकवादियों की शनिवार सुबह सबसे पहली मुठभेड़ इंटरनेशनल शूटर कैप्टन फतेह सिंह से हुई थी। उन्होंने हवलदार कुलवंत के साथ 20 मिनट तक अपनी राइफल से उन आतंकियों को रोके रखा। इतना ही नहीं, उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया और वीरगति को प्राप्त हुए। दो महीने पहले ही वह पठानकोट में तैनात हुए थे। उनका बड़ा बेटा गुरदीप सिंह भी सेना में है और छोटा बेटा नितिन ठाकुर 12वीं में पढ़ रहा है। उनकी पत्नी मधुबाला को रविवार तक उनकी शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। फतेह सिंह सेना में अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज थे। वह एशिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में निशानेबाजी में पदक जीत चुके थे।
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पठानकोट एयरबेस में घुसे आतंकियों से लोहा लेने वालों में हवलदार कुलवंत सिंह भी थे। बताया जा रहा है कि कुलवंत सिंह ने आतंकियों को गेट से अंदर घुसने से रोके रखा। यहां शुरू हुई फायरिंग के बाद ही पूरे एयरबेस में अलर्ट जारी कर दिया गया था। कुलवंत सिंह 1985 में आर्टिलरी सेना के केंद्र हैदराबाद में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। 2004 में रिटायरमेंट के बाद घर आ गए। 2006 में वह फिर सेना की डीसेंस सिक्योरिटी कोप (डीएससी) सेवा में भर्ती हो गए। दो माह पहले ही वह ओडिशा से तबदील होकर पठानकोट एयरबेस में ड्यूटी पर आए थे। मंगलवार को ही वह परिजनों से मिलकर पठानकोट वापस गए थे।
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शुक्रवार आधी रात ही इंटेलीजेंस से सूचना मिली कि आतंकी पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में घुसपैठ कर चुके हैं। फिर क्या था एयरफोर्स की गरुड़ कमांडो ट्रेड में शामिल अंबाला के गरनाला गांव के कमांडो कोरपल गुरसेवक सिंह भी अपनी प्लाटून के साथ जालंधर आदमपुर एयरबेस से पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन के लिए कूच कर गए और वहां शनिवार को आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।