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जानिए ऐसा क्या हुआ जो बहु दौड़ाने लगी ऑटो, जिद के आगे घरवाले भी हारे

Fri, 28 Jul 2017 09:31 AM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा) Updated Fri, 28 Jul 2017 09:31 AM IST
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brave lady of panchkula drives e-rickshaw for survival, in-laws supported
ई-​रिक्शा महिला ड्राइवर शकुंतला
इस महिला ने घर की दहलीज लांघी, समाज के सारे बंधन तोड़ दिए और ऑटो दौड़ाने लगी। जिद भी ऐसी की कि घरवाले भी हार गए, जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ था।
brave lady of panchkula drives e-rickshaw for survival, in-laws supported
ई-​रिक्शा महिला ड्राइवर शकुंतला
पंचकूला के मौली जागरां की रहने वाली शकुंतला उन महिलाओं के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं, जो जरा सी मुश्किल देख घबरा जाती हैं। शकुंतला ई रिक्शा चलाकर अपने बच्चों का जीवन संवार रही हैं। खास बात यह है कि इनके ई रिक्शा में ज्यादातर महिलाएं व युवतियां ही सफर करती हैं। लड़कियों का कहन है कि शकुंतला आंटी के साथ वे खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं।
brave lady of panchkula drives e-rickshaw for survival, in-laws supported
vehicle driving - फोटो : File Photo
शकुंतला का कहना है कि कोई भी काम करने में शर्म कैसी। भगवान ने हाथ पैर कमाने के लिए दिए हैं, किसी के आगे फैलाने के लिए नहीं। आज वह पूरे सम्मान के साथ ई रिक्शा चला रही हैं और अपने बेटे को शिक्षित बना रही हैं। शकुंतला की जिंदगी में कम मुसीबतें नहीं थीं। 12 साल पहले की बात है, जब उसका पति छोड़कर चला गया। गोद में मात्र तीन दिन का बेटा था और सामने पूरी जिंदगी।
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brave lady of panchkula drives e-rickshaw for survival, in-laws supported
vehicle driving
लगा कि वक्त जैसे थम गया। छोटे बच्चे को लेकर कहां जाए, इसे कैसे पालेगी, गृहस्थी कैसे चलेगी आदि सवालों ने शकुंतला को घेर लिया। कई दिन तक वह घर से नहीं निकली। राशन खत्म हो गया। तीन चार दिन तक तो जैसे तैसे बीते लेकिन भूख से नहीं लड़ सकी। मजबूरन उसने अपना सोने का पैंडल बेचा और सड़क किनारे छल्ली बेचना शुरू कर दिया। कई महीने तक यही काम करती रही। फिर लोगों के घरों में झाड़ू पोंछा लगाना शुरू किया।
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vehicle driving
इस तरह शकुंतला की गृहस्थी चलने लगी। लेकिन बेटे की बीमारी और घर के राशन का खर्च नहीं चल पा रहा था। शकुंतला ने इसी बीच ड्राइविंग सीखी और लोन लेकर ई-रिक्शा खरीद लिया। फिर ई-रिक्शा लेकर सड़कों पर निकल पड़ी। मोहल्ले के लोगों ने उसकी निंदा की। लेकिन उसने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया। बकौल शकुंतला, उसके सामने अपने बेटे का भविष्य था। वह अपने बेटे को पढ़ाना चाहती थी। इसलिए उसने ई रिक्शा चलाने का निर्णय लिया।
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