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बहादुर बेटी: सपने को उड़ान दी और छू लिया आसमां, पर घट गई अनहोनी...मिली मौत

Mon, 26 Feb 2018 02:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Updated Mon, 26 Feb 2018 02:14 PM IST
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brave daughter of india astronaut Kalpana Chawla story
कल्पना चावला
मां को अपने सपने के बारे में बताया तो उन्होंने कहा उड़ान भरो, बस फिर क्या था वो पहुंच गई अंतरिक्ष तक और फिर...पढ़ें एक बहादुर बेटी के हौंसले की दिलचस्प कहानी।
brave daughter of india astronaut Kalpana Chawla story
कल्पना चावला
देश की एक जांबाज बेटी की कहानी, जो एक छोटे से शहर से निकलकर नासा तक पहुंची और ऐसा काम किया कि वह दुनिया के लिए मिसाल बन गई। स्कूल में कभी टॉपर नहीं रही, लेकिन अंतरिक्ष तक पहुंची। हर किसी को एक न एक दिन इस दुनिया को अलविदा कहना होता है, मगर कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं। मौत महज उनके शरीर को खत्म करती है, यादों में वे हमेशा रहते हैं। कुछ ऐसी है, हरियाणा के एक छोटे से शहर करनाल से निकल कर अंतरिक्ष की दुनिया तक पहुंची कल्पना चावला की कहानी।
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कल्पना चावला
1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ बेशक कल्पना की उड़ान रुक गई, लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल है। नासा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय (उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी) महिला थी।
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कल्पना चावला
कल्पना चावला के पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती था। कल्पना ने फ्रांस के जान पियरे से शादी की, जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे। 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया था। इसी हादसे में अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली भारतीय मूल की पहली महिला व नासा वैज्ञानिक कल्पना चावला की भी मौत हो गई थी।
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कल्पना चावला
हरियाणा के करनाल में 17 मार्च 1962 को जन्म लेने वाली कल्पना अपने सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। उन्होंने टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकंडरी स्कूल, करनाल (हरियाणा) से स्कूलिंग की। स्कूल में इंग्लिश, हिंदी व ज्योग्राफी में उनका इंटरेस्ट था लेकिन उनका फेवरेट सब्जेक्ट साइंस था। वे ड्रॉइंग में हमेशा स्काय, स्टार्स और प्लेन्स ड्रॉ किया करती थीं।
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