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ऐसा क्या हुआ जो बहु ने थामा बस का स्टेयरिंग, जिद के आगे हारे घरवाले

Tue, 01 Nov 2016 09:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा) Updated Tue, 01 Nov 2016 09:24 AM IST
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brave daughter-in-law of jind drives roadways bus for survival, in-laws supported also
जींद की बहादुर बहू हरियाणा रोडवेज की बस ड्राइव करती हुई - फोटो : अमर उजाला
आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर नहीं इस बहु की जिद की बस को चलाना। उसने स्टेयरिंग थामा और चलाने लगी बस। सोच ऐसी, जिसे सेल्यूट करेंगे।
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जींद की बहादुर बहू हरियाणा रोडवेज की बस ड्राइव करती हुई - फोटो : अमर उजाला
जींद जिले के कर्मगढ़ गांव की बहू सपना (27) कहती हैं कि उसके सपने ज्यादा पढ़ाई न कर पाने के कारण टूट गए, क्योंकि क्योंकि जब वह स्कूल जाती थी तो गांव के बस अड्डे पर बसें नहीं रुकती थी। इस वजह से उसने 11वीं में ही पढ़ाई छोड़ दी और ठान लिया कि वह एक दिन रोडवेज ड्राइवर बनकर ही दम लेगी। उसकी तरह कोई भी छात्रा बस रुकने के कारण बीच में पढ़ाई छोड़े। इसके लिए वह हर बस अड्डे पर बस रोकेगी।
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जींद की बहादुर बहू हरियाणा रोडवेज की बस ड्राइव करती हुई - फोटो : अमर उजाला
हालांकि सपना इस सपने को अभी साकार नहीं कर पाई है, लेकिन उसने जिद की है कि वह एक दिन रोडवेज ड्राइवर जरूर बनेगी। हालांकि सपना अब दो बच्चों की मां है लेकिन वह अपनी जिद को पूरा करने के लिए इन दिनों हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए हर रोज गांव से 50 किलोमीटर का सफर तय कर जींद ट्रेनिंग लेने के लिए आती है। सपना मूलरूप से पंजाब के होशियारपुर जिले के गांव कुकानेट की रहने वाली है। उनके गांव में हाई स्कूल था।
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जींद की बहादुर बहू हरियाणा रोडवेज की बस ड्राइव करती हुई - फोटो : अमर उजाला
सपना बताती हैं कि गांव के हाई स्कूल में दसवीं के बाद उसे 10 किलोमीटर दूर ढोलवा कस्बे में जाना पड़ता था। कमजोर हालत के कारण घरवाले हर रोज लगने वाला किराया देने में सक्षम नहीं थे। रोडवेज की बस ही एकमात्र सहारा थी। उसने जब 11वीं में दाखिला लिया तो बसों के रुकने के कारण वह और उनके गांव की दूसरी छात्राएं हर रोज लेट हो जाती थी। कई बार तो स्कूल जाए बिना ही वापस घर लौटना पड़ता था। इसी कारण उसे बीच में ही पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी।
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जींद की बहादुर बहू हरियाणा रोडवेज की बस ड्राइव करती हुई - फोटो : अजय वर्मा
सपना 50 किलोमीटर दूरी तय कर ट्रेन से सुबह साढ़े छह बजे जींद पहुंच जाती हैं। वह सुबह साढ़े तीन चार बजे उठ लेती हैं। इसके बाद वह उनके दो बच्चों जो कि स्कूल में पढ़ने जाते हैं। उनके खाना आदि तैयार करती हैं। इसके बाद उनका पति बाइक पर उन्हें गांव से नरवाना के समीप धरौदी रेलवे स्टेशन तक छोड़कर जाते हैं। इसके बाद वह वहां से ट्रेन पकड़ती हैं। ट्रेनिंग लेकर वह दोपहर बाद घर पहुंचती हैं। सपना कहती है कि वह एक दिन अपनी जिद पूरी करके ही रहेगी।
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