पानीपत के मैदान में काफी ऐतिहासिक लड़ाईयां लड़ी गईं। आज भी एक स्मारक मौजूद है, 'काला अंब', जिसकी बेहद रोचक कहानी है। देखिए, ये रिपोर्ट।
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आम के पेड़ से निकलता था खून, काला अंब पानीपत
- फोटो : हेमंत बुद्धिराजा
'काला अंब' मतलब काला आम। कहा जाता है कि पानीपत के तृतीय युद्ध के दौरान इस जगह पर एक काफी बड़ा आम का पेड़ होता था। लड़ाई के बाद सैनिक इसके नीचे आराम करते थे। यहां हुए युद्धों में इतना रक्त बहा कि इस इलाके की मिट्टी लाल हो गई। असर आम के पेड़ पर भी पड़ा। रंग काला पड़ गया।
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आम के पेड़ से निकलता था खून, काला अंब पानीपत
- फोटो : हेमंत बुद्धिराजा
तभी से इस जगह को 'काला अंब' यानी काला आम के नाम से जाना जाने लगा। युद्ध में तकरीबन 70,000 मराठा सैनिकों की मौत हो गई थी। पेड़ पर लगे आमों को काटने से खून की तरह लाल रस निकलता था। इसलिए अगर ये कहें कि यहां के आम से खून निकलता है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
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आम के पेड़ से निकलता था खून, काला अंब पानीपत
- फोटो : हेमंत बुद्धिराजा
कई वर्षों बाद इस पेड़ के सूखने पर इसे कवि पंडित सुगन चंद रईस ने खरीद लिया। सुगन चंद ने इस पेड़ की लकड़ी से खूबसूरत दरवाजे बनवाए। यह दरवाजा पानीपत म्यूजियम में रखा गया है। अब इस जगह पर एक स्मारक बनाया गया है, जिसे 'काला अंब' कहा जाता है।
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आम के पेड़ से निकलता था खून, काला अंब पानीपत
- फोटो : हेमंत बुद्धिराजा
माना गया कि आम का रंग काला इसलिए हुआ, क्योंकि यह उस मिट्टी में पैदा हुआ था जिसमें सैनिकों का खून मिल गया था। ज़ाहिर है, यह पेड़ बहुत समय तक गायब रहा था। इस स्मारक को ’काला’ कहने का वास्तविक कारण यह भी हो सकता है कि इसके पत्ते गहरे हरे रंग के हैं।