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लेफ्टिनेंट भाई शहीद, भैया दूज पर छलकीं बहना की आंखें
Sat, 14 Nov 2015 08:42 AM IST
Updated Sat, 14 Nov 2015 08:42 AM IST
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लेफ्टिनेंट भाई शहीद, भैया दूज पर छलकीं बहना की आंखें
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देश सेवा के जज्बे से लबरेज युवा अपनी बहन से वापस लौटने का वादा करके गया था, लेकिन वो वापस नहीं लौटा। बहन नमन की आंखें नम हैं। देखिए, पूरी खबर।
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रोहतक के शहीद लेफ्टिनेंट नीतिश कक्कड़ की डायरी में चंद पंक्तियां लिखी हैं। खूबसूरत है जिंदगी बहुत, जीना इसे खुशी से... सिमटा है दस्तूर दुनिया का, इन कविताओं में... हो सके तो लफ्जों के इस हार में, कुछ मोती मैं पिरो जाऊंगा...। लेकिन अब ये पक्तियां अधूरी लग रही हैं। लग रहा है शायद इस कविता की आत्मा हम सबसे बिछुड़ गई है।
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शिवाजी कॉलोनी निवासी शहीद लेफ्टिनेंट नीतिश कक्कड़ की इकलौती बहन नमन की आंखें अपने इकलौते भाई की याद में कितनी बार नम होंगी। 26 साल की उम्र में उसके भाई नीतिश के जीवन में आई 26 मई 2015 की रात ने परिवार की तीन जिंदगियों को झकझोर दिया है। ट्रेनिंग पूरी करते ही भटिंडा कैंट में आए नीतिश की ऑन ड्यूटी सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
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भले ही नीतिश को गए 5 महीने 17 दिन बीत गए हैं, लेकिन हर आहट कक्कड़ परिवार को रुला देती है। राखी और भाई दूज पर तो नमन सभी की आंखों को नम कर देती है। भाई की शरारतें, स्पोर्टिव नेचर सब कुछ उसकी आंखों में उतर आता है। दिवाली पर व्हाट्स-एप पर भी नमन ने स्टेटस लिखा- ‘रिटर्न इज पॉसिबल’... वह बस इतना ही कई पाई, ‘आई मिस यू सो मच ब्रदर’।
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नीतिश के पिता जितेंद्र आर्य ने बताया कि जब उसकी ट्रेनिंग के पैसे आए तो सबसे पहले बहन नमन को फोन कर पूछा कि क्या गिफ्ट चाहिए? तब, नमन ने एप्पल फोन की डिमांड की थी। अगर आज उनका बेटा होता तो अपनी बहन को यह गिफ्ट जरूर करता। नीतिश की मां रेनू कक्कड़ गृहिणी हैं। बहन नमन बहादुरगढ़ के एक कॉलेज में एमसीए फाइनल ईयर में पढ़ रही हैं।
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